पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ को हाईकोर्ट की फटकार, मानसिक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए देरी पर सवाल
पंजाब हरियाणा और चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों से मांगा हलफनामा, आठ साल बाद भी कानून के प्रविधान अधूरे, गंभीर चिंता का विषय

सौजन्य से:- Jagran
मानसिक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के कानून में देरी क्यों? पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ को हाईकोर्ट की फटकार
हाईकोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 को आठ साल बाद भी पूरी तरह लागू न करने पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को फटकार लगाई है। मुख्य सच ...और पढ़ें
HighLights
- पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों से मांगा हलफनामा।
- आठ साल बाद भी कानून के प्रविधान अधूरे, गंभीर चिंता।
- मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में हो रही देरी पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 लागू हुए लगभग आठ वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इसके कई महत्वपूर्ण प्रवि आज भी पूरी तरह लागू नहीं किए गए हैं। इसे अदालत ने गंभीर चिंता का विषय बताया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के मुख्य सचिवों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि वे यह स्पष्ट करें कि पूर्व में दिए गए निर्देशों का कितना पालन हुआ है और मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के प्रविधानों को लागू करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने बताया गया कि हरियाणा सरकार ने अधिनियम के तहत नियम तो बना दिए हैं, लेकिन अभी तक राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड का गठन नहीं किया गया है।
इसके अलावा अधिनियम के तहत आवश्यक अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी नहीं की गई हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून का वास्तविक पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पंजाब सरकार की ओर से अदालत से हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा गया।
इस पर अदालत ने कहा कि यह कानून समाज के उस वर्ग की सुरक्षा और अधिकारों के लिए बनाया गया है, जो स्वयं अपने अधिकारों की रक्षा करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे में राज्य सरकारों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि वे कानून के प्रत्येक प्रावधान को समयबद्ध तरीके से लागू करें।
खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया कि वे अपने हलफनामे में स्पष्ट करें कि मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण और मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड का गठन किया गया है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
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