सुप्रीम कोर्ट ने दी राष्ट्रपति ट्रंप को खुली छूट, एजेंसी के प्रमुख को कोई भी ठोस कारण बताए बिना हटा सकते हैं
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों को बढ़ाया है, जिसमें उनको किसी भी एजेंसी के प्रमुख को कोई भी ठोस कारण बताए बिना हटा सकते हैं। इसके साथ ही फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को अपने पद पर बने रहने की इजाजत दी गई है।

सौजन्य से:- ABP News
अमेरिका में अब कुछ भी करेंगे डोनाल्ड ट्रंप? सुप्रीम कोर्ट ने दी राष्ट्रपति को खुली छूट, जानें क्या सुनाया फैसला?
अदालत ने माना कि केंद्रीय बैंक के प्रमुख को छोड़कर राष्ट्रपति अपनी इच्छा से किसी भी एजेंसी के प्रमुख को बर्खास्त कर सकते हैं और इसके लिए किसी ठोस कारण की वजह की जरूरत भी नहीं है.
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शक्तियों को बढ़ा दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा संघीय एजेंसियों के प्रमुखों को बर्खास्त करने के फैसले को बरकरार रखा है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रपति किसी भी एजेंसी के चीफ को कभी भी हटा सकते हैं. हालांकि इस फैसले में फेडरल रिजर्व यानी अमेरिका की केंद्रीय बैंक को इससे अलग रखा गया है यानी अमेरिका का राष्ट्रपति वहां के फेडरल बैंक के प्रमुख को नहीं हटा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को उनके पद पर बने रहने की इजाजत दी है. लिसा कुक ट्रंप प्रशासन की ओर से बर्खास्त किए जाने के बाद कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं. ट्रंप ने फेडरल गवर्नर पर मॉर्गेज फ्रॉड के आरोप लगाए हैं. हालांकि उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया है.
फेडरल रिजर्व के चीफ को नहीं हटा सकते ट्रंप
अदालत ने माना कि केंद्रीय बैंक के प्रमुख को छोड़कर राष्ट्रपति अपनी इच्छा से किसी भी एजेंसी के प्रमुख को बर्खास्त कर सकते हैं और इसके लिए किसी ठोस कारण की वजह की जरूरत भी नहीं है. इससे पहले संघीय कानूनों के तहत ऐसे अधिकारियों को हटाने के लिए ठोस कारण बताना जरूरी था. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 91 साल पुराने फैसले को पलट दिया, जिसमें राष्ट्रपति के अधिकार सीमित कर दिए गए थे ताकि एजेंसियां बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपने काम कर सकें.
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सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 9 जज कर रहे थे, यह फैसला 6 कंजर्वेटिव जजों के बहुमत से आया. चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा, 'हमारा मानना है कि राष्ट्रपति को अधिकारियों को हटाने से रोकने वाली व्यवस्था संविधान में निहित शक्तियों के बंटवारे के विपरीत हैं.'
जजों ने पूर्व संघीय व्यापार आयोग सदस्य रेबेका स्लॉटर के मामले में फैसला सुनाया, जिन्हें ट्रंप ने संघीय कानून के प्रावधान के बावजूद बिना कारण बताए बर्खास्त कर दिया था, जबकि कानून के अनुसार बर्खास्तगी के लिए कारण बताना आवश्यक है. ये फैसला दूसरी एजेंसियों पर भी लागू होता है, जिनमें नेशनल लेबर रिलेशंस बोर्ड, मेरिट सिस्टम्स प्रोटेक्शन बोर्ड और कंज्यूमर प्रोडक्ट सेफ्टी कमीशन शामिल हैं, जहां ट्रंप ने बोर्ड के सदस्यों को भी निकाल दिया है.
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ट्रंप से पहले किसी प्रेसिडेंट ने नहीं किया था ऐसा
बता दें कि ट्रंप से पहले किसी भी राष्ट्रपति ने परमाणु ऊर्जा, उत्पाद सुरक्षा और श्रम संबंधों सहित अमेरिकी जीवन के व्यापक क्षेत्रों को रेगुलेट करने वाली एजेंसियों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश नहीं की थी. इस मामले में सुनवाई कर रहीं जज सोनिया सोतोमेयर ने इस फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि ये समर्पण, अस्थिरता और यहां तक कि उत्पीड़न का कारण बन सकता है. उन्होंने आगे कहा, 'निश्चित रूप से, राष्ट्रपति पहले से कहीं अधिक शक्ति के साथ उभरे हैं. यह शक्ति उन्हें इस न्यायालय के छह न्यायाधीशों द्वारा दी गई है, न कि जनता या संविधान द्वारा.'
लिसा कुक के मामले में कोर्ट ने क्या कहा?
वहीं लिसा कुक के मामले में कोर्ट ने 5-4 के मत से ट्रंप प्रशासन द्वारा कुक को तत्काल पद से हटाने के प्रयास को खारिज कर दिया. रॉबर्ट्स, जस्टिस ब्रेट कावानाघ और तीन लिबरल जज बहुमत में थे. अदालत ने कहा, 'बाइडेन द्वारा फेडरल रिजर्व के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के लिए नामित कुक, कम से कम तब तक अपने पद पर बनी रह सकती हैं जब तक उनकी बर्खास्तगी को चुनौती देने वाला मुकदमा चल रहा है.'
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप हुए खुश
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से डोनाल्ड ट्रंप बहुत खुश हुए. उन्होंने इस फैसले पर कहा, 'यह बहुत सम्मान की बात है कि मौजूदा प्रेसिडेंट होने के नाते यह ऐतिहासिक और अभूतपूर्व फैसला मिला, जो प्रेसिडेंशियल शक्तियों के संबंध में अब तक दिए गए सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक है.'
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