पांवटा साहिब में भूमि विवाद मामले में अदालत ने अहम फैसला सुनाया
अदालत ने एक अपील को खारिज करते हुए दूसरी अपील को स्वीकार करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत 2
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भूमि विवाद के मामले में एक अपील खारिज तो दूसरी मंजूर
नाहन। पांवटा साहिब में करीब 19 वर्षों से चल रहे भूमि विवाद मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने मोहम्मद लतीफ के कानूनी वारिसों की ओर से दायर एक अपील को खारिज कर दिया, जबकि प्रतिदावा (काउंटर क्लेम) से संबंधित दूसरी अपील को स्वीकार कर लिया।
मामला कमला देवी और मोहम्मद लतीफ के बीच भूमि की स्थिति, स्वामित्व और रास्ते के अधिकार को लेकर चल रहा था। कमला देवी पक्ष का आरोप था कि उनकी भूमि का वास्तविक स्थान बदलकर बंदोबस्त (सेटलमेंट) के दौरान खसरा नंबरों की स्थिति में त्रुटियां हुईं। वहीं, मोहम्मद लतीफ पक्ष का कहना था कि बंदोबस्त रिकॉर्ड सही है और वे खरीदी गई भूमि के वैध मालिक हैं। उनका आरोप था कि वादी पक्ष उनकी भूमि से रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि भूमि अभिलेखों में सुधार संबंधी कार्यवाही लंबित रहने के दौरान विवादित भूमि की स्थिति में परिवर्तन से वादी पक्ष को नुकसान पहुंच सकता था। अदालत ने अंतिम आदेश में वाद (सूट) से संबंधित अपील को खारिज करते हुए 22 अगस्त 2024 के निचली अदालत के निष्कर्षों को बरकरार रखा। संवाद-- -- --
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नाहन। पांवटा साहिब में करीब 19 वर्षों से चल रहे भूमि विवाद मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश कपिल शर्मा ने मोहम्मद लतीफ के कानूनी वारिसों की ओर से दायर एक अपील को खारिज कर दिया, जबकि प्रतिदावा (काउंटर क्लेम) से संबंधित दूसरी अपील को स्वीकार कर लिया।
मामला कमला देवी और मोहम्मद लतीफ के बीच भूमि की स्थिति, स्वामित्व और रास्ते के अधिकार को लेकर चल रहा था। कमला देवी पक्ष का आरोप था कि उनकी भूमि का वास्तविक स्थान बदलकर बंदोबस्त (सेटलमेंट) के दौरान खसरा नंबरों की स्थिति में त्रुटियां हुईं। वहीं, मोहम्मद लतीफ पक्ष का कहना था कि बंदोबस्त रिकॉर्ड सही है और वे खरीदी गई भूमि के वैध मालिक हैं। उनका आरोप था कि वादी पक्ष उनकी भूमि से रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि भूमि अभिलेखों में सुधार संबंधी कार्यवाही लंबित रहने के दौरान विवादित भूमि की स्थिति में परिवर्तन से वादी पक्ष को नुकसान पहुंच सकता था। अदालत ने अंतिम आदेश में वाद (सूट) से संबंधित अपील को खारिज करते हुए 22 अगस्त 2024 के निचली अदालत के निष्कर्षों को बरकरार रखा। संवाद
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