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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से TET अनिवार्य: पश्चिम बंगाल के प्राथमिक शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा देनी होगी

पश्चिम बंगाल में प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को टीचर्स एलिजिब्लिटी टेस्ट (TET) देना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सभी कार्यरत शिक्षक, चाहे 2009 से नियुक्त हों या पाँच वर्ष से अधिक सेवा में हों, को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ेगी। शिक्षकों ने इस निर्णय पर नाराजगी जताई और इसे विश्वासघात कहा।

13 सितंबर 2026 को 05:05 am बजे
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से TET अनिवार्य: पश्चिम बंगाल के प्राथमिक शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा देनी होगी

सौजन्य से:- prabhatkhabar.com

TET Exam Mandatory: बंगाल के प्राइमरी व अपर प्राइमरी शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश, जानें TET को लेकर क्या है अंतिम समय-सीमा

स्कूल टीचर.

TET Exam Mandatory: पश्चिम बंगाल में सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) परीक्षा उत्तीर्ण करना अब अनिवार्य कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल सर्विस कमीशन को यह निर्देश जारी किया है.

कोलकाता. राज्य के प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीचर्स एलिजिब्लिटी टेस्ट (टीइटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य कर दिया गया है. शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है. जिन शिक्षकों ने अब तक टीइटी नहीं दी है, उन्हें परीक्षा देनी होगी. शिक्षा विभाग ने विकास भवन से भेजे पत्र में कहा है कि 2009 में निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त और पांच साल से अधिक समय से सेवा में कार्यरत शिक्षकों को भी टीइटी उत्तीर्ण करनी होगी.

31 अगस्त 2028 तक पास करना होगा टीइटी

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कार्यरत शिक्षकों को टीइटी उत्तीर्ण करने के लिए दो साल का समय दिया था. बाद में 29 मई 2026 के आदेश में समय-सीमा बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी गयी. इसके अनुसार कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 या उससे पहले टीइटी उत्तीर्ण करनी होगी. परीक्षा वर्ष में दो बार, यानी हर छह महीने में आयोजित की जा सकती है. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय-सीमा बढ़ाने के लिए अब कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जायेगा.

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शिक्षकों ने जतायी नाराजगी

सरकार के फैसले से शिक्षकों में आक्रोश है. उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा टीइटी देने के लिए कहना उनके लिए परेशानी का कारण बनेगा. बंगीय शिक्षा ओ शिक्षण कर्मी समिति के महासचिव स्वपन मंडल ने इसे शिक्षकों के साथ विश्वासघात बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहले शिक्षकों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अब ऐसा आदेश लागू किया गया है.

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