TMC के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, अयोग्यता मामले में देरी पर मांगा जवाब
Sign In Advertisement X सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है. लोकसभा सचिवालय को भी नोटिस दिया गया है. मामला इन सांस…

सौजन्य से:- AajTak
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सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है. लोकसभा सचिवालय को भी नोटिस दिया गया है. मामला इन सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी का है. दरअसल, यह याचिका TMC सांसद और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दाखिल की है.
अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर लोकसभा अध्यक्ष के सामने लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की है. उनका कहना है कि उन्होंने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सामने याचिकाएं दी थीं.
इन याचिकाओं पर समय पर फैसला नहीं होने का आरोप लगाया गया है. इसके बाद अभिषेक बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल हैं. अदालत ने 20 बागी सांसदों और लोकसभा सचिवालय को नोटिस जारी किया है.
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि वह किसी संवैधानिक प्राधिकारी के खिलाफ बिना उसका पक्ष सुने आदेश नहीं देना चाहती. पीठ ने कहा कि इस मामले में मुख्य मुद्दा अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से फैसला लेने में हो रही देरी है.
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जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सुनवाई के दौरान इसी पहलू पर जोर दिया. कोर्ट अब बागी सांसदों का जवाब मिलने के बाद मामले पर आगे विचार करेगा.
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश हुए. उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से लोकसभा अध्यक्ष का पक्ष रखने के लिए मौजूद हैं.
मेहता ने बताया कि स्पीकर की ओर से बागी सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं. अयोग्यता की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है. ऐसे में स्पीकर को अलग से औपचारिक नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है.
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20 सांसदों ने किया था अलग होने का दावा
मामला TMC के भीतर राजनीतिक विवाद से जुड़ा है. याचिका के अनुसार TMC के 20 सांसदों ने पार्टी नेतृत्व से अलग होने का दावा किया था. इन सांसदों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से बगावत की थी.
इन सांसदों ने कथित तौर पर ‘नेशनल सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ यानी NCPI में विलय का दावा किया था. इसके बाद TMC की ओर से इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग की गई.
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अभिषेक बनर्जी ने दल-बदल कानून से जुड़ी संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत लोकसभा अध्यक्ष के सामने अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं. उन्होंने कई बार स्पीकर से मुलाकात कर ज्ञापन भी दिए.
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सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है. कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है. बागी सांसदों और लोकसभा सचिवालय का पक्ष सामने आने के बाद सुनवाई आगे बढ़ेगी.
इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला कब तक लिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान इसी देरी को मुख्य मुद्दा माना है. अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी.
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