राजस्थान में UCC क्या है, कैसे लागू होगा? आमजन को मिले 19 सवाल
राजस्थान सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने का सुझाव आमजन से मांगे हैं। इसके लिए उच्च स्तरीय समिति ने 19 सवाल पूछे हैं। आमजन को अपने विचार रखने के लिए एक वेबसाइट पर जानकारी दी गई है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
जनता के दरबार में यूसीसी: राज्य सरकार ने मांगे आमजन से UCC कानून को लेकर सुझाव, ये 19 सवाल हैं शामिल
यूसीसी के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के चार सदस्य पहले 7 संभागों में अलग-अलग जनसुनवाई करेंगे.
Published : July 4, 2026 at 10:29 PM IST
जयपुर: प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना काम शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में आमजन से सुझाव मांगे हैं. यही नहीं कमेटी प्रदेशभर का दौरा करके आम जनसुनवाई के जरिए भी UCC पर सुझाव लेगी.
ऐसे दे सकते हैं सुझाव: गृह विभाग की ओर से जारी देश में कहा गया है कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर गठित की गई उच्च अधिकार प्राप्त उच्च स्तरीय समिति ने प्रदेश के आमजन से सुझाव आमंत्रित किए हैं. UCC के लिए गठित समिति ने प्रदेशवासियों को उनके मोबाइल पर SMS भेजा है, जिसमें कहा गया है कि राजस्थान सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) कानून लागू करने का विचार रखती है. ऐसे में आप क्या इस पर अपना विचार रखते हो ? समिति ने वेबसाइट https://ucc.rajasthan.gov.in पर साझा करने का आग्रह किया है.
पढ़ें: राजस्थान में यूसीसी की तैयारी तेज, सरकार ने बढ़ाया कदम...कांग्रेस को ऐतराज
समिति की ओर से मांगे गए सुझाव आगामी 25 जुलाई तक देने होंगे, जिसमें सबसे पहले अपने 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा या फिर जन आधार नंबर. इन नंबरों को दर्ज करने के बाद सुरक्षा कैप्चा से सत्यापन करवाने के बाद व्यक्तिगत सुझाव या फिर संगठन और संस्था के रूप में सुझाव देना चाहेंगे, यह अंकित करना होगा.
19 सवालों के जवाब हां या ना में देने होंगे, जिसमें एक सवाल बहु विकल्प का भी होगा:
- क्या आप भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित इस प्रावधान से परिचित हैं कि राज्य भारत के समस्त राज्य क्षेत्रों में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा?
- क्या आप इस बात से सहमत हैं कि यूसीसी को संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू किया जा सकता है?
- क्या आप यूसीसी को लागू करने का समर्थन करते हैं?
- क्या यूसीसी में निम्न विषयों को शामिल किया जाना चाहिए? (बहु विकल्प): A–विवाह, B–विवाह विच्छेद/तलाक, C–वसीयत द्वारा उत्तराधिकार, D–उत्तराधिकार, E–लिव-इन रिलेशनशिप
- धर्म आधारित पारिवारिक कानूनों के कई प्रावधानों में पुरुषों एवं महिलाओं के अधिकारों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है. क्या आप सहमत हैं कि इस प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त किया जाना चाहिए?
- क्या विवाह विच्छेद/तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए.
- क्या सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने वाले विवाह विच्छेद/तलाक के एक जैसे आधार (Common Grounds for Divorce) होने चाहिए.
- क्या विवाह विच्छेद/तलाक की स्थिति में भरण-पोषण (Maintenance) के लिए एक समान विधि होनी चाहिए?
- क्या यूसीसी के प्रभावी होने से पारिवारिक विवादों में कमी आएगी तथा विधिक प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी एवं सरल बनेंगी?
- क्या यूसीसी के अन्तर्गत सभी समुदायों में पुरुषों एवं महिलाओं के लिए समान सम्पत्ति अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए?
- क्या यूसीसी में सहमति से लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान होना चाहिए?
- क्या यूसीसी में लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के रजिस्ट्रेशन से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी?
- क्या लिव-इन संबंधों की समाप्ति पर विवाह विच्छेद के फलस्वरूप जो अधिकार निर्मित होते हैं, वैसे ही अधिकार निर्मित होने चाहिए?
- क्या यूसीसी के अन्तर्गत लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं उनसे जन्मित संतानों के भरण-पोषण के प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
- क्या लिव-इन में रहने वालों के लिए उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
- क्या बहुविवाह प्रथा से महिला के अधिकार सुरक्षित नहीं रहते हैं?
- क्या समान नागरिक संहिता से समाज में प्रचलित रूढ़िवादी सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त किया जा सकेगा?
- क्या स्वःअर्जित सम्पत्ति का वसीयत द्वारा निस्तारण करने के लिए एक जैसे प्रावधान होने चाहिए?
- क्या उत्तराधिकार से सम्पत्ति के निस्तारण के समान प्रावधान होने चाहिए?
जन सुनवाई की तारीख भी तय: इन 19 सवालों के अलावा आपके पास इससे संबंधित कोई डॉक्यूमेंट है, तो वह भी अपलोड कर सकते हैं. साथ ही इन सबके उत्तर के अतिरिक्त सुझाव या टिप्पणी भी 400 शब्दों में दे सकते हैं. सरकार की ओर से इसे सुरक्षित और गोपनीय रखने की बात भी कही गई है. समिति के चार सदस्य पहले सात संभागों में अलग-अलग जनसुनवाई के लिए भी निकलेंगे, जिसमें शत्रुघ्न सिंह समिति के सदस्य 10 से 11 जुलाई को जयपुर में जनसुनवाई करेंगे. बसंत सिंह 6 से 7 जुलाई को अजमेर में जनसुनवाई करेंगे. इसके अलावा उदयपुर में 13 से 14 जुलाई को जनसुनवाई करेंगे . रामस्वरूप अग्रवाल कोटा में 7 से 8 जुलाई और भरतपुर में 9 से 10 जुलाई तक जनसुनवाई करेंगे. डॉक्टर शुचि चौहान बीकानेर में जनसुनवाई करेगी.
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