सुप्रीम कोर्ट में फिर से शुरू हुआ है MLA वोटिंग राइट का मामलाः क्या जीतेगी सुक्खू सरकार?
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने स्थानीय विधायकों को शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए वोट देने का अधिकार देने के अपने फैसले के खिलाफ हिमाचल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
ULB अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में MLAs को मिलेगा वोटिंग राइट? सुप्रीम कोर्ट पहुंची सुक्खू सरकार
सुप्रीम कोर्ट में शहरी निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव में MLA के वोटिंग राइट मामले में इस दिन होगी सुनवाई.
By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : June 11, 2026 at 4:13 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश में शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए विधायकों के वोट करने के अधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. हिमाचल प्रदेश में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार मामले में हिमाचल हाईकोर्ट की रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. मामला अभी हिमाचल हाईकोर्ट में विचाराधीन है. हाईकोर्ट की डबल बेंच ने फिलहाल नगर निकायों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव में स्थानीय विधायकों को मिले वोट देने के अधिकार पर अंतरिम रोक लगा रखी है. अब इस मामले पर सर्वोच्च अदालत में सोमवार को सुनवाई होनी है.
दरअसल हिमाचल हाईकोर्ट में हिमाचल प्रदेश सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत स्थानीय विधायक को संबंधित शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में मतदान का अधिकार दिया गया था. हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किए थे. अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार की 26 जुलाई 2023 की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा रखी है. इस अधिसूचना में राज्य सरकार ने स्थानीय शहरी निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए संबंधित विधायकों को वोट का अधिकार दिया गया था. मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अगली सुनवाई 17 जून को होनी तय की गई है.
हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज के साथ-साथ शहरी निकायों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं. राज्य में 4 नगर निगम समेत 22 नगर पंचायतों और 25 नगर परिषदों में सदस्याें का चुनाव हो चुका है. मगर इनमें अभी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव होने बाकी हैं. वहीं, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेशों के बाद स्थानीय विधायक संबंधित नगर निकायों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में शामिल नहीं हो पाएंगे. इसी बीच राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता अख्तियार किया है.
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