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मुफ्त UPI का दौर समाप्त? नए कानून से आपके पैसे के हिसाब में बदल सकती है स्थिति

लोकसभा से पारित नए कानून से आपकी यूपीआई ट्रांजैक्शन पर दंड से बचना जरूरी क्योंकि इसमें दंड का उल्लेख किया गया है संभव है कि यहां नए बिल के कारण या तो आपको या किसी भी पेमेंट के लिए शुल्क देना पड़ सकता है

7 अगस्त 2026 को 06:15 am बजे
मुफ्त UPI का दौर समाप्त? नए कानून से आपके पैसे के हिसाब में बदल सकती है स्थिति

सौजन्य से:- ABP News

मुफ्त UPI का सफर खत्म! नए कानून से आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा?

लोकसभा से पास हुए नए बिल के बाद आगे चलकर यूपीआई और दूसरे डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगने का रास्ता खुल गया है. क्या अब हर यूपीआई पेमेंट पर पैसे देने होंगे? जानिए पूरा मामला.

रोज यूपीआई से पेमेंट करने वालों के लिए खास खबर है. लोकसभा ने एक ऐसा बिल पास किया है, जिससे आने होने वाले UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का रास्ता खुल गया है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि आज से यूपीआई पर पैसे कटने शुरू हो जाएंगे. फिलहाल, यूपीआई पहले की तरह ही फ्री है. नए कानून के बाद सरकार को जरूरत पड़ने पर कुछ डिजिटल पेमेंट पर चार्ज लगाने का अधिकार मिल जाएगा.

क्या यूपीआई पर चार्ज देना होगा?

नहीं, अभी आम लोगों के लिए यूपीआई पूरी तरह फ्री है. सरकार ने कोई नया चार्ज लागू नहीं किया है. सिर्फ कानून में ऐसा बदलाव किया गया है, जिससे आगे चलकर सरकार तय कर सके कि किन डिजिटल पेमेंट पर एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाया जाए और किन पर नहीं.

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मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है?

एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो फीस है जो किसी डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के बदले बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को मिलता है. पहले यूपीआई और रू पे डेबिट कार्ड पर जीरो एमडीआर की व्यवस्था थी, यानी दुकानदारों से भी यह शुल्क नहीं लिया जाता था. अब नए कानून के बाद सरकार जरूरत के हिसाब से इस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है.

आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ेगा?

फिलहाल आपकी जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार ने अभी किसी तरह का चार्ज लागू नहीं किया है. लेकिन अगर आगे चलकर यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू होता है, तो उसका असर दुकानदारों, पेमेंट कंपनियों और कुछ मामलों में ग्राहकों पर भी पड़ सकता है. हालांकि ये पूरी तरह सरकार के आने वाले फैसले पर डिपेंड करेगा.

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सरकार ने बदलाव क्यों किया?

सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में बैंक और पेमेंट कंपनियों के लिए इस सिस्टम को चलाने और बेहतर बनाने की लागत भी बढ़ रही है. नए कानून से सरकार के पास जरूरत के मुताबिक नियम तय करने की सुविधा होगी.

हर यूपीआई पेमेंट पर फीस लगेगी?

अभी ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है. सरकार चाहे तो सिर्फ कुछ खास तरह के ट्रांजैक्शन या बड़े भुगतान पर एमडीआर लागू कर सकती है. ये भी पॉसिबल है कि छोटे लेनदेन या आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पहले की तरह मुफ्त ही रहे.

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