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अपराध

बेबसी का बहाना नहीं चलेगा, सुप्रीम कोर्ट ने चंबल को लेकर राज्यों के खिलाफ क्यों की सख्त कार्रवाई?

Jansatta के अनुसार · 24x7 NYAYA
बेबसी का बहाना नहीं चलेगा, सुप्रीम कोर्ट ने चंबल को लेकर राज्यों के खिलाफ क्यों की सख्त कार्रवाई?
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश पर अंतरराज्यीय नेशनल चंबल घड़ियाल सैंक्चुअरी और उसके आसपास गैरकानूनी रेत खनन को लेकर सख्त हो गया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की आलोचना की और राज्य प्रशासन पर लगातार कोई कार्रवाई न करने और गंभीरता की कमी दिखाने के लिए फटकार लगाई।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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गाजियाबाद में दुष्कर्म के मामले में आरोपित को अदालत ने बरी किया

गाजियाबाद में दुष्कर्म के मामले में आरोपित को अदालत ने बरी किया

गाजियाबाद की विशेष अदालत ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के आरोपी रोबिन को बरी कर दिया। पीड़िता और उसकी मां के बयानों में विरोधाभास व साक्ष्यों की कमी के चलते अदालत ने आरोपित को बेनकाब कर दिया।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

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न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली: एक अनुभवी न्यायाधीश का जीवन और उल्लेखनीय निर्णय

न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली का जीवन और करियर न्याय के सिद्धांतों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिन्होंने एक वकील के रूप में अपना अभ्यास शुरू किया और गुजरात उच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

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अदालतों का बोझ घटाने के लिए वैकल्पिक विवाद निपटान पर ज़ोर।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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