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कानून

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | जिम्मेदार अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांग रहा लोक सेवक; मांग सीधी नहीं होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम |  जिम्मेदार अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांग रहा लोक सेवक; मांग सीधी नहीं होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | जिम्मेदार अधीनस्थों के लिए रिश्वत मांग रहा लोक सेवक; मांग सीधी नहीं होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट गुरसिमरन कौर बख्शी 2 जून 2026 5:54 अपराह्न IST अगली कहानी - घर - / - शीर्ष कहानियाँ - / - भ्रष्टाच…

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

कानून

'राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करना पड़ेगा', कानून विशेषज्ञ ने कहा- कोर्ट से राहत की उम्मीद नहीं

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'राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करना पड़ेगा', कानून विशेषज्ञ ने कहा- कोर्ट से राहत की उम्मीद नहीं अगर 10 सर्कुलर रोड आवास खाली करने के नोटिस के खिलाफ राबड़ी देवी कोर्ट जाएंगी तो क्या उनको राहत मिलेगी? पढ़ें पूरी खबर.…

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

अपराध

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पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

मुकदमे

तलाक और गुजारा भत्ता को लेकर फैमिली कोर्ट में सुनवाई

फैमिली कोर्ट में तलाक और गुजारा भत्ता को लेकर सुनवाई, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और आय, संपत्ति तथा पारिवारिक परिस्थितियों से संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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