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अपराध

बेंगलुरु के अदालत ने आरएसएस पर सांप्रदायिक टिप्पणियों के आरोप में प्रियंक खरगे और हारिस नलपाड को दिलाई है अदालत की चुनौती

Lokmat News Hindi के अनुसार · 24x7 NYAYA
बेंगलुरु के अदालत ने आरएसएस पर सांप्रदायिक टिप्पणियों के आरोप में प्रियंक खरगे और हारिस नलपाड को दिलाई है अदालत की चुनौती
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

अदालत ने तेजस ए की शिकायत के आधार पर एक आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। प्रियंक खरगे और मोहम्मद हारिस नलपाड को 21 जुलाई को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। अदालत ने दूसरे आरोपी दिनेश गुंडू राव के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

वकील

सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक आयोग की मांग

सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक आयोग की मांग

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका में सोशल मीडिया पर गलत सूचनाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए न्यायिक आयोग की मांग की गई है। याचिका में एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई है, जो मंच की जवाबदेही, एल्गोरिथम पारदर्शिता, बाल संरक्षण और संस्थागत अखंडता के साथ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को संतुलित करने वाले एक व्यापक संवैधानिक ढांचे की सिफारिश करे।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

मुकदमे

27 लाख मतदाताओं के नाम पर से क्यों कट गए? सुप्रीम कोर्ट में अधीर रंजन चौधरी ने दायर की नई जनहित याचिका

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद भी एसआईआर प्रोसेस के दौरान वोटर लिस्ट से लोगों के नाम कटने का विवाद थम नहीं रहा है. अधीर रंजन चौधरी ने बंगाल की मतदाता सूची से करीब 27 लाख लोगों के नाम हटाए जाने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की है. इसमें लाखों लोगों के नाम का मनमाने ढंग से काटने का आरोप है.

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानूनी विश्लेषण

क्या सरकारी अधिकारी कानून से ऊपर हैं?

भारत का संविधान स्पष्ट रूप से सभी को कानून के समक्ष समान बताता है, लेकिन व्यवहार में क्या है?

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

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