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मुकदमे

डीएमके ने करूर भगदड़ मामले में पक्षकार बनने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पर जोर दिया

India Legal के अनुसार · 24x7 NYAYA
डीएमके ने करूर भगदड़ मामले में पक्षकार बनने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट पर जोर दिया
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

डीएमके ने करूर भगदड़ मामले में अपने अनुपस्थिति को दूर करने और घटना में शामिल लोगों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर दिया है। यह मामला 27 सितंबर, 2025 को तमिलनाडु में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान भड़की घटना से जुड़ा है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी और 142 लोग घायल हुए थे। डीएमके का दावा है कि कई आरोपित वर्तमान में तमिलनाडु मंत्रिपरिषद में हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करने से बचने के लिए बयान किए जा रहे हैं।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

मुकदमे

शंभूवाला क्षेत्र की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को धार्मिक संपत्ति बताकर स्वामित्व पर सिरमौर कोर्ट से झटका

शंभूवाला क्षेत्र की करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को धार्मिक संपत्ति बताकर स्वामित्व पर सिरमौर कोर्ट से झटका

शंभूवाला क्षेत्र में 'सतगुरु साहिब धाम' की जमीन बताकर स्वामित्व चुनौती देने वाले मामले में निचली अदालत ने अपना फैसला बरकरार रखा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि राजस्व रिकॉर्ड सुधार का अधिकार राजस्व अधिकारियों के पास है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

मुकदमे

किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मामले में अदालत का बड़ा फैसला

सिरमौर जिले की एक अदालत ने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण की वसूली मामले में फैसला सुनाया है, जिसमें ऋण लेने वाले और गारंटर को 74,507 रुपये ब्याज सहित चुकाने के आदेश दिए गए हैं। यह मामला वर्ष 2012 में लिए गए 50,000 रुपये के ऋण से जुड़ा है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

मुकदमे

आरोपी को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी

नाहन में अदालत ने तहसील नाहन के रहने वाले रणजीत सिंह को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उन पर बिना लाइसेंस और बीमा के वाहन चलाने पर 1,000 रुपये का जुर्माना ठहराया गया।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

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