सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबंध लगाने वाले राज्य कानूनों को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक बार दांव का तत्व शामिल हो जाने पर, अंतर्निहित खेल की प्रकृति प्रासंगिक नहीं रहती है और ऐसी गतिविधियों को 'सट्टेबाजी और जुआ' के दायरे में आती है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।
अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

