सुप्रीम कोर्ट: चार साल की दुष्कर्म पीड़िता का इलाज करने से किया था इनकार, अब भरेंगे 12 लाख का जुर्माना!
सुप्रीम कोर्ट ने दो निजी अस्पतालों को चार वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को समय पर इलाज न देने के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसके पिता को कुल 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a75a741374ecd376e0e8aca","slug":"supreme-court-hospital-refused-to-treat-4-year-old-survivor-now-liable-to-pay-12-lakh-fine-2026-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: चार साल की दुष्कर्म पीड़िता का इलाज करने से किया था इनकार, अब अस्पताल भरेंगे 12 लाख जुर्माना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: चार साल की दुष्कर्म पीड़िता का इलाज करने से किया था इनकार, अब अस्पताल भरेंगे 12 लाख जुर्माना
Fri, 07 Aug 2026 03:07 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 07 Aug 2026 03:07 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने दो निजी अस्पतालों को चार वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को समय पर इलाज न देने के लिए जिम्मेदार मानते हुए उसके पिता को कुल 12 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने संकेत दिया कि वह गंभीर अपराधों के पीड़ितों के इलाज और जांच को लेकर अस्पतालों एवं पुलिस के लिए व्यापक दिशानिर्देश भी जारी करेगी।
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को गाजियाबाद के दो निजी अस्पतालों को चार वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में उसके परिवार को क्रमशः 10 लाख रुपये और 2 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि दोनों अस्पतालों ने बच्ची को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई, जिससे उसकी जान चली गई।
सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि वह गंभीर अपराधों के पीड़ितों के उपचार और ऐसे मामलों की जांच के दौरान अस्पतालों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारियों को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगी।
सुनवाई के दौरान एसआईटी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची गंभीर रूप से घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद लगभग पांच घंटे तक जीवित थी, लेकिन संबंधित अस्पतालों ने उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
किन अस्पतालों को कितना मुआवजा देने का आदेश मिला?
अदालत ने गाजियाबाद स्थित सुपर स्पेशियलिटी सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल को 10 लाख रुपये तथा खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये पीड़िता के पिता को चार सप्ताह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया।
घटना वाले दिन क्या हुआ था?
16 मार्च को आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चार वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिली। परिजन बच्ची को सबसे पहले दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में इस मामले की सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच करने में दिखाई गई कथित अनिच्छा पर गंभीर नाराजगी जताई थी।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से झटका, उम्रकैद पर रोक लगाने से सर्वोच्च अदालत का इनकार
पीड़िता के पिता ने अदालत से क्या मांग की थी?
पीड़िता के पिता, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने याचिका दायर कर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की थी। 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के 'असंवेदनशील रवैये' पर कड़ी फटकार लगाई थी। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ), दोनों अस्पतालों और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किए थे।
विज्ञापन
सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि वह गंभीर अपराधों के पीड़ितों के उपचार और ऐसे मामलों की जांच के दौरान अस्पतालों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारियों को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगी।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान एसआईटी रिपोर्ट में क्या सामने आया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची गंभीर रूप से घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद लगभग पांच घंटे तक जीवित थी, लेकिन संबंधित अस्पतालों ने उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
किन अस्पतालों को कितना मुआवजा देने का आदेश मिला?
अदालत ने गाजियाबाद स्थित सुपर स्पेशियलिटी सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल को 10 लाख रुपये तथा खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये पीड़िता के पिता को चार सप्ताह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया।
घटना वाले दिन क्या हुआ था?
16 मार्च को आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चार वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिली। परिजन बच्ची को सबसे पहले दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में इस मामले की सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच करने में दिखाई गई कथित अनिच्छा पर गंभीर नाराजगी जताई थी।
ये भी पढ़ें: Supreme Court: नारायण साईं को सुप्रीम कोर्ट से झटका, उम्रकैद पर रोक लगाने से सर्वोच्च अदालत का इनकार
पीड़िता के पिता ने अदालत से क्या मांग की थी?
पीड़िता के पिता, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, ने याचिका दायर कर मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की थी। 10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में गाजियाबाद पुलिस के 'असंवेदनशील रवैये' पर कड़ी फटकार लगाई थी। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित थाना प्रभारी (एसएचओ), दोनों अस्पतालों और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किए थे।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
गुजरात में नौवाहनविभाग और नौवहन कानूनों पर कार्यशाला का उद्घाटन

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़े मामलों की सुनवाई

राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में 10 अगस्त को सुनवाई

भाजपा हमलावर, अदालत ने बोला झूठे थे उत्पीड़न के आरोप बृजभूषण शरण सिंह केस पर

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

दिल्ली केस में भाग जाने वाली पत्नी और ससुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

पटना हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत के बाद दिया व्यक्ति के लापता होने के मामले में सीबीआई जांच का आदेश
ताज़ा ख़बरें
- निरीक्षण, मूल्यांकन और शिकायतें: केंद्र ने ट्रिब्यूनलों के लिए नए आयोग का प्रस्ताव रखा
- ममता बनर्जी पर हमला: अरविंद केजरीवाल का भाजपा पर तीखा हमला
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय साप्ताहिक राउंड-अप: 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026
- यूपी में खराब कानून व्यवस्था पर अखिलेश यादव ने की सरकार की आलोचना
- भाजपा सरकार ने कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया: अखिलेश यादव
- स्मृति सभा में शामिल होने पर टिस के दो छात्रों की गिरफ्तारी, अदालत ने जमानत देने से किया इनकार
- मंत्री पटेल ने विपक्ष के आरोपों का दी reply, कहा नहीं ओबीसी आरक्षण घटाया
- क्या भारत में किसी राज्य में धर्म परिवर्तन के लिए सबसे सख्त कानून है?

