सुप्रीम कोर्ट ने धारा‑147ए पर हाई कोर्ट के फैसले को रोका, पुनः मूल्यांकन पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई, जिसमें आयकर अधिनियम की धारा‑147ए को असंवैधानिक कहा गया था और री‑असेसमेंट नोटिस रद्द कर दिया गया था। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य मामले के अंतिम निपटारे तक कोई भी असेसमेंट कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी, और अंतिम सुनवाई 3 दिसंबर को निर्धारित की गई है।

सौजन्य से:- Jagran
आयकर अधिनियम की धारा-147ए पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे; असेसमेंट की कार्रवाई पर भी लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आयकर अधिनियम की धारा 147ए को असंवैधानिक बताने वाले फैसले पर ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने धारा 147ए पर हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
- असेसमेंट की कार्रवाई मुख्य मामले के अंतिम निपटारे तक आगे नहीं बढ़ेगी।
- मामले को 3 दिसंबर को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
आईएएनएस, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा-147ए को असंवैधानिक बताया गया था और क्षेत्राधिकार वाले असेसिंग आफिसर्स द्वारा जारी रीअसेसमेंट नोटिस को रद कर दिया गया था।
जस्टिस जेबी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह अंतरिम आदेश केंद्र सरकार और अन्य आयकर अधिकारियों द्वारा 10 सितंबर को दिए गए हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य मामले के अंतिम निपटारे तक असेसमेंट की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी और मामले को तीन दिसंबर को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। जस्टिस पार्डीवाला की अगुआई वाली पीठ ने आदेश दिया, "हाई कोर्ट द्वारा पारित विवादित फैसले और आदेश पर इस शर्त पर रोक रहेगी कि मुख्य मामले के अंतिम निपटारे तक असेसमेंट की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी।"
यह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर कई याचिकाओं से शुरू हुआ था, जिनमें आयकर अधिनियम की धारा-147ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। इसे वित्त विधेयक, 2026 के जरिये पिछली तिथि यानी एक अप्रैल, 2021 से लागू किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने यह घोषित करने की मांग की थी कि धारा-147ए संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 265 के विरुद्ध है। उन्होंने अधिनियिम की धारा-148 के तहत जारी नोटिस को भी चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया कि यह नोटिस अधिनियम की धारा-151ए के तहत निर्धारित आटोमेटेड एलोकेशन मैकेनिज्म एवं उसके तहत बनाई गई योजना के तहत जारी नहीं किए गए थे।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता

पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन

ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज

इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी

ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
ताज़ा ख़बरें
- राष्ट्रीय सभा के विशेषज्ञ प्रतिनिधि करेंगे 17 मसौदा कानूनों पर विस्तृत चर्चा
- कर्नाटक व पश्चिम बंगाल में चुनावी रोल से हटाए गए लाखों मतदाता: समीक्षा प्रक्रिया में देरी और अपील लंबित
- चुनाव आयोग में आंतरिक असहमति और नियुक्ति नियमों पर संवैधानिक चुनौती
- जब रेफ़री भी गलती करे: चुनाव आयोग विवाद को समझाया 7 मुख्य प्रश्नों में
- सुप्रीम कोर्ट ने एआईएफ युद्ध विधवा को पुनः सेवा में लौटाया
- बैंकिंग क्षेत्र के तीन नए कानूनों के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत योजना जारी
- प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम कानून के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय योजना जारी की
- सुप्रीम कोर्ट ने ऑबसी क्रिमी लेयर निर्णय के भविष्य के प्रयोग पर जजमेंट रोक रखा

