20 रुपये की रिश्वत के लिए 30 साल तक चला मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा? - supreme court verdict in 1996 gujarat case legal battle over 20 rupee bribe dragged on for 30 years
20 रुपये की रिश्वत के लिए 30 साल तक चला मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में 30 साल से चल रहे मुकदमे का निपटारा किया है। कोर्ट ने गुजरात सरकार के दो कर्मचारियों की…

सौजन्य से:- Jagran
20 रुपये की रिश्वत के लिए 30 साल तक चला मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने 20 रुपये की रिश्वत के आरोप में 30 साल से चल रहे मुकदमे का निपटारा किया है। कोर्ट ने गुजरात सरकार के दो कर्मचारियों की सजा को रद कर दिया।
HighLights
- 20 रुपये की रिश्वत का मामला 30 साल चला।
- सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के कर्मचारियों की सजा रद की।
- तीन दशकों बाद आखिरकार मुकदमे का अंत हुआ।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 20 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में कोर्ट में तीन दशकों तक एक मुकदमा चला, जो कि अब आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ बंद हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए गुजरात सरकार के दो कर्मचारियों की सजा को रद कर दिया है। यह मामला फरवरी 1996 का है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने 30 साल पुराने मामले में एक क्लर्क और चपरासी को बरी कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ 20 रुपये बरामद होने के आधार पर सजा बरकरार नहीं रखी जा सकती, जब तक यह साबित न हो जाए कि उन्होंने रिश्वत की मांग की थी।
क्या है मामला?
यह बात 1996 की है। एक छात्र शैक्षिक फीस में छूट पाने के लिए इनकम सर्टिफिकेट (आय प्रमाण पत्र) लेने आनंद जिले की बेचरी ग्राम पंचायत कार्यालय गया था।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि क्लर्क ने आय प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 120 रुपये की मांग की, जिसमें से क्लर्क ने 100 रुपये अपने लिए मांगे और 20 रुपये चपरासी के लिए मांगे।
छात्र ने इस मामले की शिकायत एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में की। सर्टिफिकेट मिलने के बाद, छात्र ने चपरासी को 20 रुपये दिए थे। रेड करने वाली टीम ने चपरासी से वही नोट बरामद किए, लेकिन क्लर्क के पास 100 रुपये नहीं मिले।
सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दावों पर गौर किया कि छात्र ने एक अलग मामले में कथित मांग के बारे में अलग बयान दिया था। छात्र ने एक अलग मामले में कहा था कि आरोपी ने शुरू में 200 रुपये मांगे थे और बाद में 120 रुपये पर समझौता किया। यह दावा ट्रायल कोर्ट के सामने उसकी गवाही का हिस्सा नहीं था।
शीर्ष अदालत ने इस बात को भी महत्वपूर्ण माना कि ACB ने छात्र को निर्देश दिया था कि अगर मांग की जाए तो पूरे 120 रुपये सौंप दें। इसके बावजूद, उसने चपरासी को केवल 20 रुपये दिए थे।
कोर्ट को छात्र पर इस मामले में भी शक हुआ कि जब क्लर्क चपरासी के ठीक बगल में था, तो बाकी रकम क्यों नहीं दी गई, जबकि उसने चपरासी को कथित 20 रुपये की रिश्वत दी थी।
जिरह के दौरान, छात्र ने यह भी स्वीकार किया कि चपरासी ने खुद उससे किसी रिश्वत की मांग नहीं की थी। बेंच ने यह भी देखा कि छात्र ने इनकम सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही चपरासी को 20 रुपये सौंपे थे। इन सभी बातों से ही कोर्ट को अभियोजन पक्ष द्वारा बताई गई घटना पर शक हुआ।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 20 के तहत कानूनी धारणा के मुद्दे का हवाला देते हुए, कोर्ट ने कहा कि चूंकि शुरुआती मांग ही साबित नहीं हुई थी, इसलिए चपरासी से केवल 20 रुपये की बरामदगी अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं करती है।
कोर्ट ने चपरासी के इस दावे को भी अधिक उचित पाया कि छात्र ने उसे 20 रुपये इसलिए दिए थे क्योंकि अगले दिन ईद थी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस 1996 के मामले में फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट के फैसलों को रद कर दिया और दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
यह भी पढ़ें- मोदी सरकार का GenZ प्लान तैयार, सभी केंद्रीय मंत्रियों को दिया नया टास्क
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को विवादास्पद नागरिकता डेटाबेस के उपयोग की स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत
- कानून का सही उपयोग: बहादुरपुर में एससी-एसटी अधिनियम पर बैठक
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की, आदेश से नहीं थोप सकते भाषा
- एपी हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी मानने के बाद तीन‑राजधानी प्रस्ताव को निरर्थक घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं रोका SIR?
- महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह की बरी को चुनौती, दिल्ली कोर्ट में दायर की अपील
- ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश

