एपीओ 2025 में आरक्षण नियम उल्लंघन: हाईकोर्ट ने आयोग से पूछा प्रीलिम्स का रिजल्ट कैसे तैयार किया जाता है?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर याचिका पर सुनवाई करते हुए लोक सेवा आयोग से प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है. आयोग से पूछा गया है कि जनरल कैटेगरी ओपन (अनारक्षित) कैटेगरी होती है तो उसमें प्रीलिम्स का रिजल्ट तैयार करने की कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
एपीओ 2025 भर्ती: किस प्रक्रिया से तैयार होता है प्रीलिम्स का रिजल्ट? हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग से मांगी जानकारी
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने पंकज वर्मा व दो अन्य की याचिका पर की टिप्पणी.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 1, 2026 at 10:54 PM IST
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एपीओ भर्ती 2025 में आरक्षण नियमों के उल्लंघन को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए लोक सेवा आयोग से प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने पूछा कि जनरल कैटेगरी ओपन (अनारक्षित) कैटेगरी होती है तो उसमें प्रीलिम्स का रिजल्ट तैयार करने की कौन सी प्रक्रिया अपनाई जाती है? यदि आरक्षण के नियमों में फेरबदल कर अभ्यर्थियों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए किया गया है तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 का सीधा उल्लंघन है और यदि प्रीलिम्स का रिजल्ट शुद्ध रूप से मेरिट के आधार पर है तो आयोग इसे हलफनामे पर लिखित रूप में प्रस्तुत करे. कोर्ट ने रजत यादव मामले में राजस्थान हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के चर्चित निर्णय का संदर्भ देकर आयोग से कहा कि ओपन केटेगरी का मतलब सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर स्थान देना है.
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने पंकज वर्मा व दो अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी और वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी व अवनीश त्रिपाठी को सुनकर की. कोर्ट ने आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सात अगस्त तक का समय देते हुए शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. याचियों के अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने कोर्ट में आयोग के पूरक शपथ-पत्र का जवाब दाखिल किया. दोनों पक्षों की ओर से विभिन्न निर्णयों के कंपाइलेशन को देखने के बाद कोर्ट ने आयोग से इस बात का एफिडेविट दाखिल करने को कहा कि आयोग यह स्पष्ट करे कि प्रीलिम्स में जनरल कैटेगरी का रिजल्ट/कट ऑफ मेरिट के आधार पर बनाया जाता है या फिर रिजर्व कैटेगरी अभ्यर्थियों के छोड़कर सिर्फ जनरल कैटेगरी अभ्यर्थियों को ही जनरल कैटेगरी में रखकर तैयार किया जाता है.
याचिका में यूपी लोक सेवा आयोग के नौ जनवरी 2020 के ऑफिस मेमोरेंडम और यूपी एपीओ 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती दी गई है. याचियों का कहना है कि मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी कैंडिडेट्स को प्रीलिम्स में ओपन केटेगरी में स्थान नहीं दिया गया है. उन्हें उनकी ही केटेगरी में रखा गया है, इसलिए आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया, जिससे याचियों का चयन प्रीलिम्स परीक्षा में नहीं हो सका. याचिका में आयोग के ऑफिस मेमोरेंडम और प्रीलिम्स रिजल्ट को निरस्त और मेंस को स्थगित करने की मांग की गई है.
साथ ही मेरिटोरियस रिजर्व्ड कैटेगरी कैंडिडेट्स को प्रीलिम्स में ओपन केटेगरी में स्थान देते हुए प्रीलिम्स का रिजल्ट फिर से बनाने का आदेश देने की भी मांग की गई है. याचिका के अनुसार लोक सेवा आयोग का ऑफिस मेमोरेंडम ये कहता है कि आरक्षण का लाभ चयन के अंतिम चरण में दिया जाएगा, जो यूपी रिजर्वेशन एक्ट 1994 की धारा 3(6) और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दीपेंद्र यादव और सौरव यादव तथा अन्य कई मामलों में निर्णयों के विपरीत है.
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