ओडिशा हाईकोर्ट में जजों का संकट: 33 स्वीकृत पदों पर केवल 17 कार्यरत, 1.72 लाख मामले पड़े ठप - odisha high court judges shortage above 1 lakh cases pending
ओडिशा हाईकोर्ट में जजों का संकट: 33 स्वीकृत पदों पर केवल 17 कार्यरत, 1.72 लाख मामले पड़े ठप ओडिशा हाईकोर्ट में स्वीकृत 33 पदों के मुकाबले केवल 17 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जिससे 1.72 लाख मामले लंबित हैं और न्याय मिलने में द…

सौजन्य से:- Jagran
ओडिशा हाईकोर्ट में जजों का संकट: 33 स्वीकृत पदों पर केवल 17 कार्यरत, 1.72 लाख मामले पड़े ठप
ओडिशा हाईकोर्ट में स्वीकृत 33 पदों के मुकाबले केवल 17 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जिससे 1.72 लाख मामले लंबित हैं और न्याय मिलने में देरी हो रही है।
HighLights
- ओडिशा हाईकोर्ट में 1.72 लाख मामले लंबित, न्यायाधीशों की भारी कमी।
- स्वीकृत 33 के मुकाबले केवल 17 न्यायाधीश, संख्या और घटने का डर।
- बार एसोसिएशन ने रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग की।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। उड़ीसा हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की भारी कमी को लेकर चिंता गहराती जा रही है। स्वीकृत 33 पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 17 न्यायाधीश कार्यरत हैं, जबकि अदालत में करीब 1.72 लाख मामले लंबित हैं। ऐसे में न्याय मिलने में हो रही देरी को लेकर वकीलों और वादकारियों की चिंता बढ़ गई है।
उड़ीसा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि न्यायाधीशों की कमी के कारण न्यायिक व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर मामलों के त्वरित निपटारे पर पड़ रहा है।
बार एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान स्थिति में एक न्यायाधीश पर औसतन 10 हजार से अधिक लंबित मामलों का बोझ है। हर वर्ष मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिससे लोगों को समय पर न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है।
और घट सकती है न्यायाधीशों की संख्या
स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि कार्यरत 17 न्यायाधीशों में से दो के स्थानांतरण की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम कर चुका है। इसके अलावा दो न्यायाधीश अक्टूबर और नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि इस बीच नई नियुक्तियां नहीं हुईं तो हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या घटकर 13 तक पहुंच सकती है।
उड़ीसा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललाटेंदु सामंतराय ने कहा कि वर्तमान में प्रभावी रूप से हाईकोर्ट में केवल 15 न्यायाधीश ही उपलब्ध हैं। नवंबर के अंत तक दो और न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने के बाद संख्या 13 रह जाएगी, जबकि तब तक लंबित मामलों की संख्या दो लाख तक पहुंच सकती है।
राष्ट्रपति और सीजेआई को भेजा जाएगा ज्ञापन
बार एसोसिएशन ने राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) तथा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के सदस्यों को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया है।
इसमें रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की जाएगी। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया तो शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा के प्रतिनिधित्व पर भी चिंता
न्यायाधीशों की कमी के बीच सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी सामने आया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से किसी भी ओड़िया न्यायाधीश की नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट में नहीं हुई है।
एसोसिएशन के सचिव हृदानंद महापात्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ओडिशा का प्रतिनिधित्व बढ़ना जरूरी है। उनका कहना है कि जब राज्य का कोई न्यायाधीश शीर्ष अदालत में नहीं होगा तो भविष्य में किसी ओड़िया न्यायाधीश के भारत का मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बनने की संभावना भी कम हो जाएगी।
न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की मांग
वकीलों ने न्यायिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने और पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की नियुक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा नई नियुक्तियों के लिए सिफारिशें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है और न्याय व्यवस्था पर दबाव गहराता जा रहा है।
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