उप-कोर्ट मैनेजर्स के लिये नई सेवा नियमावली, 81 पदों की तैनाती और वेतन ₹56,100‑₹1.77 लाख
उत्तरी प्रदेश की अदालतों में 81 कोर्ट मैनेजर्स की नियुक्ति के लिये नई नियमावली मंजूर हुई है, जिससे केस‑फ़्लो, मानव संसाधन और बुनियादी सुविधाओं का समन्वय बेहतर होगा। उनके वेतन ₹56,100 से लेकर ₹1.77 लाख तक निर्धारित किया गया है, और इससे जजों पर प्रशासनिक भार कम हो कर न्यायिक कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा। इस योजना से राज्य को लगभग ₹3.97 करोड़ वार्षिक अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ेगा।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई नियमावली मंजूर:यूपी के हाईकोर्ट और जिला अदालतों में 81 की तैनाती; ₹56,100 से ₹1.77 लाख तक वेतन
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उत्तर प्रदेश की अदालतों में अब न्यायिक कामकाज के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को भी ज्यादा व्यवस्थित करने की तैयारी है। योगी कैबिनेट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश की जनपदीय अदालतों में काम करने वाले कोर्ट मैनेजर्स के लिए नई सेवा नियमावली को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत कुल 81 कोर्ट मैनेजर्स तैनात किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इससे केस-फ्लो, मानव संसाधन, आधारभूत सुविधाओं और अदालतों के प्रशासनिक समन्वय जैसे कामों की निगरानी बेहतर हो सकेगी।
81 कोर्ट मैनेजर्स के लिए तय हुआ वेतनमान
नई नियमावली में कोर्ट मैनेजर्स की सेवा शर्तों और वेतन ढांचे को भी निर्धारित किया गया है। उनका वेतनमान ₹56,100 से ₹1,77,500 तक होगा। सरकार का मानना है कि स्पष्ट सेवा नियम होने से कोर्ट मैनेजर्स की जिम्मेदारियों और कामकाज में एकरूपता आएगी।
जजों का प्रशासनिक बोझ कम करने में मदद
कोर्ट मैनेजर्स का मुख्य काम न्यायालयों के प्रशासनिक और प्रबंधकीय पक्ष को संभालने में सहयोग करना होगा। इनमें मानव संसाधन, कोर्ट की आधारभूत सुविधाएं, केस-फ्लो मैनेजमेंट और अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों के बीच समन्वय जैसे काम शामिल हैं। इस व्यवस्था से न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे वे न्यायिक कार्यों पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तैयार हुई नियमावली
नई नियमावली 16 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोर्ट मैनेजर्स को लेकर दिए गए निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों और निष्कर्षों के आधार पर नियमावली का मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया था। कैबिनेट ने अब इसे मंजूरी दे दी है।
हर साल 3.97 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च
नई व्यवस्था लागू होने से राज्य सरकार पर करीब ₹3.97 करोड़ का सालाना अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि कोर्ट मैनेजर्स की व्यवस्था को संस्थागत रूप देने से अदालतों का प्रशासनिक ढांचा मजबूत होगा और कामकाज में बेहतर समन्वय एवं दक्षता आएगी।
वादकारियों को भी फायदा मिलने की उम्मीद
कोर्ट मैनेजमेंट में सुधार का असर सीधे अदालत आने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। केस की प्रशासनिक प्रक्रिया, सुविधाओं, संसाधनों और समन्वय की निगरानी बेहतर होने से न्यायालयों के रोजमर्रा के कामकाज को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यानी नई व्यवस्था का फोकस सिर्फ कोर्ट मैनेजर्स की सेवा शर्तें तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालतों के प्रशासनिक प्रबंधन को एक अलग पेशेवर व्यवस्था देने पर है।
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