होमवकीलकक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू करना बोझक, छात्रों पर दबाव बढ़ाता है: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना
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कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू करना बोझक, छात्रों पर दबाव बढ़ाता है: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा है कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू करना छात्रों पर अधिक दबाव डालता है। उन्होंने कहा कि नौवीं कक्षा पहले से ही तनावपूर्ण होती है, इसलिए नई भाषा नौवीं में नहीं, बल्कि छठी कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।

16 जुलाई 2026 को 11:14 am बजे
कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू करना बोझक, छात्रों पर दबाव बढ़ाता है: सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना

सौजन्य से:- Navbharat Times

तमिलनाडु सरकार की याचिका पर बेंच ने की टिप्पणी

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की उस अपील पर सुनवाई के दौरान की जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, हाई कोर्ट ने राज्य के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। तमिलनाडु लंबे समय से नवोदय विद्यालयों का विरोध करता रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि इन विद्यालयों में लागू तीन-भाषा नीति उसकी दो-भाषा नीति के अनुरूप नहीं है।सीबीएसई की तीन-भाषा नीति की वैधता का मामला

हालांकि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सीबीएसई की तीन-भाषा नीति की वैधता का मामला सीधे तौर पर सुनवाई के लिए नहीं आया था, लेकिन फिर भी जस्टिस नागरत्ना ने तीसरी भाषा शुरू करने के समय को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली अलग-अलग जनहित याचिकाएं फिलहाल चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने पेंडिंग हैं। तीन-भाषा नीति को लेकर तमिलनाडु की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच फिलहाल इस नीति पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय की हुई है। इसी दौरान जस्टिस नागरत्ना ने अन्य मामले की सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार के वकील ने कहा कि राज्य की आपत्ति तीन-भाषा नीति को लेकर है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई की नीति में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'राज्य की भाषा पढ़ाई जाएगी, अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी और तीसरी कोई भी भाषा हो सकती है। इसमें कहीं नहीं कहा गया कि वह हिंदी ही होगी।'आपको हिंदी नहीं चाहिए, तो संस्कृत होने पर क्या समस्या है?

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रहे गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) की ओर से अधिवक्ता जी. प्रियदर्शिनी ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) भी स्पष्ट रूप से कहती है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार से सवाल किया कि यदि आपको हिंदी नहीं चाहिए, तो संस्कृत होने पर क्या समस्या है? जवाब में राज्य सरकार के वकील ने कहा कि तीसरी भाषा कक्षा 9 से अनिवार्य होती है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा .. नहीं, यह बहुत गलत है। नौवीं कक्षा पहले से ही तनावपूर्ण होती है। नौवीं में नई भाषा क्यों शुरू करते हैं? इसे छठी कक्षा से शुरू करना चाहिए। उन्होंने अपने स्कूली जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके समय में मिडिल स्कूल से ही तीसरी भाषा पढ़ाई जाती थी। उन्होंने कहा, 'हमारे स्कूल में एसएसएलसी परीक्षा की तैयारी के लिए मिडिल स्कूल से तीसरी भाषा शुरू हो जाती थी। जिनकी दूसरी भाषा हिंदी होती थी, वे कन्नड़ तीसरी भाषा पढ़ते थे और इसके उलट भी व्यवस्था थी। संस्कृत का भी विकल्प था। जितनी जल्दी तीसरी भाषा शुरू होगी, उतना बेहतर होगा।'कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू न करें, केंद्र से बोलीं जस्टिस नागरत्ना

केंद्र सरकार को अड्रेस करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'केंद्र सरकार से मेरा अनुरोध है कि कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू न करें। चाहे सीबीएसई हो, आईसीएसई हो या राज्य बोर्ड, दसवीं बोर्ड परीक्षा होती है और आठवीं के अंत से ही छात्रों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ने लगता है। उन्होंने 1976 के अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि उस समय भी छात्रों को कक्षा 8 से ही दसवीं की तैयारी कराई जाती थी। उन्होंने कहा, 'यदि उस समय इतना दबाव था, तो आज के छात्रों पर कितना अधिक दबाव होगा। इसलिए नई भाषा नौवीं में नहीं, बल्कि छठी कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।'सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु सरकार को यह सलाह भी दी कि केवल इसलिए केंद्र सरकार की योजनाओं का विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि वे केंद्र की हैं। उन्होंने कहा, 'आपकी अपनी शिक्षा व्यवस्था हो सकती है, लेकिन केंद्र सरकार के स्कूलों को आने से मत रोकिए। यह सोच नहीं होनी चाहिए कि चूंकि यह केंद्र सरकार की योजना है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं करेंगे। पीठ ने यह भी कहा कि जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच बातचीत अभी जारी है। इसलिए फिलहाल अदालत इस मुद्दे के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं कर रही है। बातचीत के परिणाम के आधार पर आगे की सुनवाई की जाएगी।

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