9,800 करोड़ खर्च के बावजूद, पुराने लंबित मामलों पर कोई असर नहीं
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दस साल से ज्यादा पुराने 10,094 और 80,660 मामले लंबित हैं, जिसके लिए सरकार ने 9,800 करोड़ खर्च किए।

सौजन्य से:- Panchjanya
साल 2011 से अब तक अदालतों की इमारतें बेहतर बनाने और टेक्नोलॉजी लगाने पर सरकार ने 9,800 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। लेकिन पुराने लंबित मामलों पर इसका खास असर नहीं पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में 10 साल से ज्यादा पुराने 10,000 से ज्यादाpan मामले अभी भी लंबित हैं। इनमें से 558 मामले 20 साल से ज्यादा पुराने हैं और 26 मामले 30 साल से भी ज्यादा पुराने चल रहे हैं।
देश के 25 हाई कोर्टों में 30 साल से ज्यादा पुराने 80,000 से ज्यादा मामले पेंडिंग हैं।
कानून मंत्री ने संसद में क्या बताया
पिछले हफ्ते संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि मामलों को समय पर निपटाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से न्यायपालिका पर है। अदालतों ने इन पुराने मामलों के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की है।
मंत्री ने आगे बताया कि मामलों का समय पर निपटारा कई बातों पर निर्भर करता है। जैसे- पर्याप्त जज और न्यायिक अधिकारी, सहायक स्टाफ, इमारतों की सुविधा, मामले की जटिलता, सबूतों की प्रकृति, वकीलों, जांच एजेंसियों, गवाहों और मुकदमेबाजों का सहयोग, और नियम-कायदों का सही से पालन।
जजों की कमी कितनी है
सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में खाली पद जल्दी भर दिए जाते हैं। लेकिन हाई कोर्ट और निचली अदालतों में स्थिति अलग है। 25 हाई कोर्टों में 1,122 स्वीकृत पदों में से 341 पद खाली हैं। निचली अदालतों में 30,868 स्वीकृत पदों में से 7,311 पद खाली पड़े हैं।
इसे भी पढ़ें: NTA ने जारी किया 7.5 करोड़ का सुरक्षा टेंडर, अब मुख्यालय और ऑफिस की 24 घंटे होगी निगरानी
खाली पदों की वजह
कानून मंत्री ने कहा कि हाई कोर्टों में जजों की नियुक्ति के लिए सिफारिशें समय पर नहीं हो पातीं। हर हाई कोर्ट का कोलेजियम चीफ जस्टिस और दो सबसे सीनियर जजों से बनता है। ये कोलेजियम तय समय में सिफारिश नहीं करते, जिसकी वजह से पद खाली रह जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट में जजों की सिफारिश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शुरू करते हैं।
क्या-क्या प्रयास हो रहे हैं
सभी 25 हाई कोर्टों और जिला अदालतों में ‘एरियर्स कमेटी’ बनाई गई हैं, जिनका काम 5 साल से ज्यादा पुराने मामलों को निपटाना है। सरकार ने पेंडेंसी कम करने के लिए कुछ नए कानून भी बनाए हैं। इनमें न्यू क्रिमिनल लॉज 2023, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (संशोधन) एक्ट 2018, कमर्शियल कोर्ट्स (संशोधन) एक्ट 2018 और स्पेसिफिक रिलीफ (संशोधन) एक्ट 2018 शामिल हैं।
आंकड़ों का आधार
ये आंकड़े नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के 16 जुलाई 2026 तक के हैं। सुप्रीम कोर्ट में कुल लंबित मामले करीब 96,000 के आसपास हैं, जिनमें 10 साल से ज्यादा पुराने 10,094 मामले हैं। हाई कोर्टों में कुल पेंडेंसी 64 लाख से ज्यादा है, जिसमें 30 साल पुराने 80,660 मामले हैं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस मोहपात्रा का छत्तीसगढ़ में तबादला, सुप्रीम कोर्ट ने 4 जजों का किया ट्रांसफर

पटना हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस: जानिए कौन हैं वी. कामेश्वर राव

वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट का नवीन चीफ जस्टिस नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बड़ी सिफारिश, न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव बन सकते हैं पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन का प्रस्ताव

नौकरीपेशा लोगों के लिए कानून की पढ़ाई पर लगी रोक, अब केवल नियमित पाठ्यक्रम ही मान्य

ड्रग्स मामलों की जांच में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने बरी होने के बाद दिया बयान
ताज़ा ख़बरें
- एनजीटी को निकोबार परियोजना रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए: ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक से पहले कांग्रेस - द ट्रिब्यून
- भारत: बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश घुगे को कलकत्ता हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव
- जस्टिस रवींद्र वी घुगे अब कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होंगे
- चार हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस, नोमिनेटेड किन्हें?
- सुप्रीम कोर्ट में बड़ी दिशा चुनौतीपूर्ण बदलाव, चार जजों का हाईकोर्ट का संभावित सामना: जानिए क्या है कॉलेजियम की सिफारिश
- मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ी, 15 नए न्यायाधीशों ने ली शपथ
- पटना उच्च न्यायालय के नए मुख्य न्यायाधीश: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश
- सुप्रीम कोर्ट ने अडानी-राजस्थान पावर विवाद में फिर किया फेरबदल, पूर्व जज की जगह दूसरे जज को बनाया आर्बिट्रेटर

