कॉमेडी, पॉडकास्ट और AI कंटेंट पर लगेगी लगाम: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और AI कंटेंट के नियमन के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में ऑनलाइन फैलाई गई गलत सूचनाओं का जिक्र किया गया है, जिसमें कई भारतीय जजों और केंद्रीय मंत्रियों का बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग लेने का आरोप लगाया गया है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
कॉमेडी, पॉडकास्ट और AI कंटेंट पर लगेगी लगाम? नियमन के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची जनहित याचिका
Edited by: दीपांशु|भाषा•
स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, सोशल मीडिया और AI कंटेंट के नियमन के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
यचिका में ऑनलाइन फैलाई गई गलत सूचनाओं का जिक्र
वकील विशाल तिवारी की याचिका में हाल में ऑनलाइन फैलाई गई कुछ ‘‘गलत’’ सूचना का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया है कि कई भारतीय जजों और केंद्रीय मंत्रियों ने इस महीने की शुरुआत में लंदन में करदाताओं के पैसे से बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था।कम समय में बड़े स्तर पर फैली गलत सूचनाएं
याचिका में कहा गया है कि भ्रामक सामग्री बहुत कम समय में असाधारण रूप से व्यापक स्तर पर प्रसारित हो गई और आधिकारिक स्पष्टीकरण प्रभावी ढंग से पहुंचने से पहले ही संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज, उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर व्यापक जन-चर्चा, आलोचना और अटकलों को जन्म दे दिया।प्रतिक्रियात्मक प्रकृति का है कानूनी तंत्र
जनहित याचिका में वकील तिवारी ने कहा कि मौजूदा कानूनी तंत्र मुख्यतः प्रतिक्रियात्मक प्रकृति का है और तब सक्रिय होता है, जब झूठी या भ्रामक जानकारी पहले ही व्यापक स्तर पर प्रसारित होकर अपूरणीय प्रभाव पैदा कर चुकी होती है।फैक्ट-चेक होने तक फैल जाती है भ्रामक जानकारी
याचिका में कहा गया कि जब तक फैक्ट-चेक या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किए जाते हैं, तब तक लाखों उपयोगकर्ता गलत जानकारी देख, साझा और उस पर भरोसा कर चुके हो सकते हैं, जिससे प्रतिष्ठा को लंबे समय तक नुकसान पहुंच सकता है और जनता का भरोसा कम हो सकता है।डिजिटल बहस का विषय बना
याचिका में कहा गया कि यह बयान चाहे हास्य, व्यंग्य, तात्कालिक बातचीत या मनोरंजन सामग्री के रूप में दिया गया हो, लेकिन एल्गोरिदमिक प्रसार ने इसे एक सीमित अभिव्यक्ति से बदलकर महिलाओं की गरिमा, सहमति, निजता, सार्वजनिक नैतिकता और संवैधानिक जिम्मेदारी से जुड़ी राष्ट्रव्यापी डिजिटल बहस का विषय बना दिया।याचिका में वकील ने किया अनुरोध
याचिका में अनुरोध किया गया है कि भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट के जजों की एक विदेशी बैडमिंटन प्रतियोगिता में कथित भागीदारी को लेकर सोशल मीडिया मंचों और डिजिटल प्रकाशनों पर प्रसारित भ्रामक, अपमानजनक तथा संस्थाओं की छवि धूमिल करने वाली सामग्री की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए।जांच के लिए बनाएं आयोग
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि झूठी, भ्रामक और डिजिटल माध्यमों से छेड़छाड़ कर तैयार कथित विमर्शों के प्रसार की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।क्या है 370 रुपये की बिरयानी वाला विवाद
इससे पहले, गुरुग्राम की एक कंपनी ने अपने एक कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया था। यह कर्मचारी कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो के दौरान किए गए विवादास्पद ‘‘370 रुपये की बिरयानी’’ बयान के कारण चर्चा में आया था। इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक आक्रोश और आलोचना देखने को मिली थी।कन्वर्सेशन शुरू करें
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