होममुकदमेअगर तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक स्थिति घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता : हाई कोर्ट
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अगर तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक स्थिति घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता : हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वीकार किया है कि यदि तलाक-ए-हसन वैध और निर्विवाद है, तो फैमिली कोर्ट को तलाकशुदा स्थिति को घोषित करने से मना नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में, कोर्ट की भूमिका वैवाहिक स्थिति दर्ज करने तक सीमित होती है।

4 जुलाई 2026 को 04:24 am बजे
अगर तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक स्थिति घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता : हाई कोर्ट

सौजन्य से:- Jagran

वैध तलाक-ए-हसन को मान्यता देने से फैमिली कोर्ट नहीं कर सकता इन्कार : हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला सुनाया है कि यदि तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध और निर्विवाद है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट ने वैध तलाक-ए-हसन को मान्यता दी।

- फैमिली कोर्ट तलाकशुदा स्थिति घोषित करने से मना नहीं कर सकता।

- कोर्ट की भूमिका वैवाहिक स्थिति दर्ज करने तक सीमित।

विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मुस्लिम पर्सनल ला के तहत दिए गए वैध तलाक-ए-हसन को लेकर शुक्रावार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि तलाक की वैधता को लेकर पति-पत्नी के बीच कोई विवाद नहीं है और फैमिली कोर्ट प्रथमदृष्टया यह पाता है कि तलाक मुस्लिम पर्सनल ला के अनुसार हुआ है, तो वह वैवाहिक स्थिति को तलाकशुदा घोषित करने से इन्कार नहीं कर सकता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में फैमिली कोर्ट की भूमिका केवल वैवाहिक स्थिति का सार्वजनिक अभिलेख तैयार करने तक सीमित होती है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने यह फैसला एक मुस्लिम पति की प्रथम अपील स्वीकार करते हुए दिया।

इसके साथ ही लखनऊ के फैमिली कोर्ट का वह आदेश निरस्त कर दिया गया, जिसमें यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया गया था कि तलाक को किसी पक्ष ने चुनौती नहीं दी है और घोषणा की आवश्यकता स्पष्ट नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की वैवाहिक स्थिति को आधिकारिक रूप से तलाकशुदा घोषित कर दिया।

यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट के निर्देश पर यूपी में सरप्लस बेसिक शिक्षकों का ब्योरा मांगा, छह जुलाई को अगली सुनवाई

मामले के अनुसार पति-पत्नी का निकाह एक फरवरी 2022 को हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी सितंबर 2023 से मायके में रहने लगी। दोनों के बीच सुलह कराने के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पति ने दारुल कजा के माध्यम से समझौते की कोशिश की और फिर मुस्लिम पर्सनल ला के तहत एक-एक माह के अंतराल पर तीन नोटिस भेजकर तलाक-ए-हसन की प्रक्रिया पूरी की।

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