अगर तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक स्थिति घोषित करने से इनकार नहीं कर सकता : हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्वीकार किया है कि यदि तलाक-ए-हसन वैध और निर्विवाद है, तो फैमिली कोर्ट को तलाकशुदा स्थिति को घोषित करने से मना नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में, कोर्ट की भूमिका वैवाहिक स्थिति दर्ज करने तक सीमित होती है।

सौजन्य से:- Jagran
वैध तलाक-ए-हसन को मान्यता देने से फैमिली कोर्ट नहीं कर सकता इन्कार : हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने फैसला सुनाया है कि यदि तलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार वैध और निर्विवाद है, तो फैमिली कोर्ट तलाकशुदा वैवाहिक ...और पढ़ें
HighLights
- हाई कोर्ट ने वैध तलाक-ए-हसन को मान्यता दी।
- फैमिली कोर्ट तलाकशुदा स्थिति घोषित करने से मना नहीं कर सकता।
- कोर्ट की भूमिका वैवाहिक स्थिति दर्ज करने तक सीमित।
विधि संवाददाता, जागरण, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मुस्लिम पर्सनल ला के तहत दिए गए वैध तलाक-ए-हसन को लेकर शुक्रावार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि यदि तलाक की वैधता को लेकर पति-पत्नी के बीच कोई विवाद नहीं है और फैमिली कोर्ट प्रथमदृष्टया यह पाता है कि तलाक मुस्लिम पर्सनल ला के अनुसार हुआ है, तो वह वैवाहिक स्थिति को तलाकशुदा घोषित करने से इन्कार नहीं कर सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में फैमिली कोर्ट की भूमिका केवल वैवाहिक स्थिति का सार्वजनिक अभिलेख तैयार करने तक सीमित होती है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने यह फैसला एक मुस्लिम पति की प्रथम अपील स्वीकार करते हुए दिया।
इसके साथ ही लखनऊ के फैमिली कोर्ट का वह आदेश निरस्त कर दिया गया, जिसमें यह कहते हुए वाद खारिज कर दिया गया था कि तलाक को किसी पक्ष ने चुनौती नहीं दी है और घोषणा की आवश्यकता स्पष्ट नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की वैवाहिक स्थिति को आधिकारिक रूप से तलाकशुदा घोषित कर दिया।
यह भी पढ़ें- हाई कोर्ट के निर्देश पर यूपी में सरप्लस बेसिक शिक्षकों का ब्योरा मांगा, छह जुलाई को अगली सुनवाई
मामले के अनुसार पति-पत्नी का निकाह एक फरवरी 2022 को हुआ था। वैवाहिक विवाद के बाद पत्नी सितंबर 2023 से मायके में रहने लगी। दोनों के बीच सुलह कराने के प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद पति ने दारुल कजा के माध्यम से समझौते की कोशिश की और फिर मुस्लिम पर्सनल ला के तहत एक-एक माह के अंतराल पर तीन नोटिस भेजकर तलाक-ए-हसन की प्रक्रिया पूरी की।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

