JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, याचिका में निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई या रिटायर्ड जजों की अगुवाई वाली कमेटी से जांच कराने का निर्देश देने की मांग की गई है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
JPSC परीक्षा विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. याचिका में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.
By Sumit Saxena
Published : August 8, 2026 at 5:16 PM IST
नई दिल्ली: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इसमें 2025 संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है.
सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने एडवोकेट सत्यम सिंह के जरिए यह याचिका दाखिल की है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई या रिटायर्ड जजों की अगुवाई वाली कमेटी से जांच कराने का निर्देश देने की मांग की है.
याचिका में एक आग्रह में सुप्रीम कोर्ट से प्रतिवादी नंबर 2-झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन को 19 अप्रैल को हुई संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा -2025 को रद्द करने और उसके बाद कानून के मुताबिक और सुप्रीम कोर्ट से मंजूर सुरक्षा उपायों के तहत नई प्रारंभिक परीक्षा कराने का निर्देश देने की मांग की गई है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह प्रतिवादी नंबर 2-झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा एडवर्टाइजमेंट नंबर 01/2026 के तहत हुई संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा -2025 से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्षता के साथ समय पर जांच करे.
याचिका में यह भी मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या झारखंड के बाहर के किसी हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस या जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र कमेटी बनाने का निर्देश दिया जाए, जिसमें फोरेंसिक साइंस, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, एग्जामिनेशन सिक्योरिटी, OMR इवैल्यूएशन, साइबर सिक्योरिटी और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के एक्सपर्ट्स की मदद हो, ताकि उस परीक्षा की ईमानदारी की जांच की जा सके.
याचिका में OMR स्कैनिंग, कोडिंग, इवैल्यूएशन और रिजल्ट बनाने वाले सिस्टम के स्वतंत्र ऑडिट के बारे में भी निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से जांच एजेंसी या स्वतंत्र कमेटी को यह तय करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि क्या वस्तुनिष्ठ और सत्यापित सामग्री के आधार पर दागी और बेदाग उम्मीदवारों को भरोसेमंद तरीके से अलग किया जा सकता है.
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