होम›अपराध›दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था: सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया
अपराध

दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था: सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया

- Hindi News - National - Delhi Police Assault Action Case; CJP Jantar Mantar Protest | Supreme Court दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था:सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन…

18 अगस्त 2026 को 10:56 am बजे
दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था:  सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

- Hindi News

- National

- Delhi Police Assault Action Case; CJP Jantar Mantar Protest | Supreme Court

दिल्ली पुलिस बोली- CJP का संसद मार्च गैरकानूनी था:सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया

- कॉपी लिंक

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे।

पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाई लेवल कमेटी बनाएगा।

संसद मार्च की 2 तस्वीरें…

पुलिस का हलफनामा, 6 पॉइंट

- पुलिस-प्रदर्शनकारी के घायल होने पर- 20 जुलाई को जंतर-मंतर के आसपास 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी मौजूद थे। करीब 3 किलोमीटर के इलाके में फैली इस भीड़ को संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे। झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए।

- कील वाली लाठियों के आरोप पर- याचिकाओं में चुनिंदा फोटो, अधूरे वीडियो और अपुष्ट मीडिया रिपोर्ट्स का इस्तेमाल किया गया। इनमें पुलिस की कार्रवाई का पूरा संदर्भ नहीं दिखता। वीडियो में ऐसी लाठी की सिर्फ एक घटना दिखती है। वह लाठी एक प्रदर्शनकारी के हाथ में थी।

- पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के हमले पर- प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, पुलिसकर्मियों से मारपीट की और उनका सुरक्षा सामान खींचा। इसके बाद हिंसा रोकने के लिए कानूनी तरीके अपनाए गए। बल प्रयोग जरूरी हो गया था। भीड़ नियंत्रित करने के लिए लाठियां मान्य उपकरण हैं।

- पुलिसवालों के सिविल ड्रेस में होने पर- स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के जवान सादे कपड़ों में भीड़ के बीच मौजूद थे। यह सामान्य सुरक्षा रणनीति है।

- जंतर-मंतर में हिस्ट्रीशीटर आने पर- प्रदर्शन में असामाजिक तत्व और आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग भी शामिल थे। करीब 2,873 प्रदर्शनकारियों पर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, रेप और पॉक्सो जैसे मामले दर्ज हैं। इन मामलों की जांच SIT करेगी।

- फेशियल रिकग्निशन के इस्तेमाल पर- फेशियल रिकग्निशन सॉफ्टवेयर से हर व्यक्ति की प्रोफाइल दर्ज नहीं होती और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की निगरानी नहीं की जाती। इसका इस्तेमाल गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वालों की पहचान के लिए होता है। सिर्फ फेशियल रिकग्निशन के आधार पर कार्रवाई नहीं होती। फील्ड वेरिफिकेशन भी किया जाता है। छोटे मामलों या ट्रैफिक चालान वालों की पहचान नहीं की जाती।

हाईलेवल कमेटी करेगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने CJP के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी बनाने का फैसला किया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, पूर्व DGP, पूर्व CBI प्रमुख समेत अन्य सदस्य होंगे।

कोर्ट बुधवार को कमेटी के गठन का औपचारिक आदेश जारी करेगा। इससे पहले याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षों से सदस्यों के नाम पर सुझाव लिए जाएंगे।

- CCTV फुटेज: प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के वीडियो की जांच।

- पुलिस कार्रवाई: कथित ज्यादा बल प्रयोग और अन्य शिकायतों की पड़ताल।

- महिला प्रदर्शनकारी: कथित दुर्व्यवहार से जुड़ी शिकायतों की जांच।

- घटनाक्रम: उपलब्ध फुटेज और शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल।

CJP प्रोटेस्ट 49 दिन चला, 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का जंतर-मंतर प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जबकि CJP ने पुलिस पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का आरोप लगाया।

पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई।

----------------------------

ये खबर भी पढ़ें…

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली, जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ANI को दिए इंटरव्यू में जेन-जी आंदोलन, जंतर-मंतर प्रदर्शन, अभिजीत दीपके, राहुल गांधी और कांग्रेस पर कई बयान दिए। उन्होंने कहा कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…

- जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली: जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी; अभिजीत दीपके AAP कार्यकर्ता, छात्र नेता कैसे बन गए

- खड़गे बोले-मैं विधायक बना था तब अमित शाह बच्चे थे: हमें देशभक्ति न सिखाएं; उत्तराखंड में शुद्धिकरण को लेकर BJP को धर्म विरोधी बताया

- सुप्रीम कोर्ट में फांसी सिस्टम खत्म करने की याचिका खारिज: मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई थी

- LIVEUP के 25 शहरों में बारिश, घर-थाने-अस्पताल में पानी भरा: बंगाल के आसनसोल में बाढ़; राजस्थान-दिल्ली समेत 14 राज्यों में अलर्ट

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग
अपराध

बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव
अपराध

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं
अपराध

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप
अपराध

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद
अपराध

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
अपराध

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?
अपराध

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
अपराध

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट

ताज़ा ख़बरें