बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पर जमानत शर्तों के उल्लंघन का आरोप, सीबीआई ने विशेष अदालत में शिकायत दर्ज
सीबीआई ने कोलकाता की विशेष अदालत में पार्थ चटर्जी को जमानत की शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया, क्योंकि वे नियमित रूप से जांच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हो रहे हैं। उनके वकील ने मुवक्किल की खराब तबीयत के कारण वर्चुअल माध्यम से पेश होने की संभावना बताई, और अगली सुनवाई 29 सितंबर को तय हुई। हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए शर्तों में साप्ताहिक पेशी, पासपोर्ट जमा और गवाहों से संपर्क न करना शामिल था।

सौजन्य से:- Jagran
बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी के खिलाफ विशेष अदालत में शिकायत, जमानत की शर्तों का पालन नहीं करने का आरोप
सीबीआइ ने कोलकाता की विशेष अदालत में बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पर जमानत की शर्तों का उल्लंघन ...और पढ़ें
HighLights
- सीबीआइ ने पार्थ चटर्जी पर जमानत शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
- पूर्व शिक्षा मंत्री जांच अधिकारी के समक्ष नियमित पेश नहीं हो रहे।
- पार्थ के वकील ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बचाव किया।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। एसएससी शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही सीबीआइ ने बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी पर जमानत की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को कोलकाता के बिचार भवन स्थित विशेष अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि पार्थ जमानत की शर्त के अनुसार नियमित रूप से जांच अधिकारी के समक्ष पेश नहीं हो रहे हैं।
पार्थ चटर्जी के वकील ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल की तबीयत खराब रहती है और उन्हें कभी-कभी अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ता है। वकील के अनुसार, इस संबंध में सीबीआइ को ईमेल भेजकर वर्चुअल माध्यम से पेश होने की संभावना के बारे में जानकारी दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
हाई कोर्ट ने लगाई थीं कई शर्तें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने सितंबर 2025 में सीबीआइ के मामले में पार्थ चटर्जी को 10 लाख रुपये के बांड पर जमानत दी थी। शर्तों के तहत उन्हें हर सप्ताह जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना, सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में उपस्थित रहना, पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करना और अनुमति के बिना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जाना था। इसके अलावा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों से संपर्क नहीं करने और किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होने की शर्त भी लगाई गई थी।उन्हें कोई सरकारी पद संभालने से भी रोक दिया गया था, हालांकि विधायक के रूप में काम करने की अनुमति थी।
पार्थ चटर्जी को शिक्षक भर्ती घोटाले में जुलाई 2022 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दिन उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के घर से करीब 20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। बाद में इसी मामले में सीबीआई ने भी दोनों को गिरफ्तार किया। अर्पिता को 2024 में जमानत मिल गई थी। पार्थ को हाई कोर्ट के जमानत आदेश के बावजूद तत्काल रिहाई नहीं मिली और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 11 नवंबर 2025 को वह जेल से बाहर आए थे
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