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Delhi High Court की MCD को दो टूक; NOC के चक्कर में सुरक्षा से समझौता नहीं, फौरन अबुल फजल नाला ढकने के आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने ओखला के अबुल फजल नाले को फौरन ढकने और सड़क किनारे सेपरेटर दीवार बनाने का निर्देश MCD को दिया है। कोर्ट ने UP सिंचाई विभाग की NOC का इंतजार नहीं करने को कहा है। सुनवाई में STP और औद्योगिक क्षेत्रों से…

26 अगस्त 2026 को 06:22 am बजे
Delhi High Court की MCD को दो टूक; NOC के चक्कर में सुरक्षा से समझौता नहीं, फौरन अबुल फजल नाला ढकने के आदेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

दिल्ली हाई कोर्ट ने ओखला के अबुल फजल नाले को फौरन ढकने और सड़क किनारे सेपरेटर दीवार बनाने का निर्देश MCD को दिया है। कोर्ट ने UP सिंचाई विभाग की NOC का इंतजार नहीं करने को कहा है। सुनवाई में STP और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।

नई दिल्ली: ओखला के अबुल फजल नाले के किनारे सुरक्षा इंतजामों में देरी पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए MCD को नाला तुरंत ढकने और सड़क के किनारे सेपरेटर दीवार बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इन कामों के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की NOC का इंतजार नहीं किया जाए।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने मंगलवार को नाले की स्थिति से जुड़ी तस्वीरों का अवलोकन किया। तस्वीरों में सड़क के किनारे खुला और कचरे से भरा नाला दिखाई दे रहा था। कोर्ट ने इसे स्थानीय निवासियों और सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए सुरक्षा का गंभीर खतरा माना।

NOC के इंतजार में नहीं रुकेगा सुरक्षा काम, MCD को कोर्ट की मंजूरी

MCD ने कोर्ट को बताया कि नाले के पास लाइट और रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं।

हालांकि, नाले और सड़क के बीच फिजिकल सेपरेटर दीवार बनाने का काम UP सिंचाई विभाग की NOC नहीं मिलने के कारण रुका हुआ था।

MCD के अधिकारियों ने बताया कि NOC के लिए संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। कोर्ट ने इस प्रशासनिक देरी को सुरक्षा कार्य रोकने का आधार नहीं माना और MCD को NOC के बिना ही जरूरी काम शुरू करने की अनुमति दे दी।

11 में से सिर्फ दो STP मानकों के अनुरूप

सुनवाई के दौरान दिल्ली में सीवेज ट्रीटमेंट की स्थिति पर भी रिपोर्ट पेश की गई। दिल्ली जल बोर्ड ने बताया कि NGT के नए मानकों के अनुरूप बनाने के लिए 11 STP को अपग्रेड किया जा रहा है।

इनमें से अभी केवल दो प्लांट नए मानकों पर खरे उतरे हैं।

बाकी नौ के लिए वर्क ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने की समयसीमा दिसंबर 2027 से मई 2028 के बीच है।

जल बोर्ड के मुताबिक, 31 दिसंबर 2027 तक दिल्ली की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 814.26 MGD से बढ़कर 1,041.10 MGD होने की उम्मीद है।

25 औद्योगिक क्षेत्रों पर भी कार्रवाई की जरूरत

बेंच ने 25 नॉन-कन्फॉर्मिंग औद्योगिक क्षेत्रों के पुनर्विकास में लंबे समय से जारी गतिरोध पर भी गौर किया। MCD और DSIIDC की ओर से प्लानिंग में राहत की मांग की गई थी, लेकिन DDA ने मास्टर प्लान-2047 में बदलाव का हवाला देते हुए इसे आगे नहीं बढ़ाया। कोर्ट ने यमुना में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज जाने से रोकने के लिए इन इलाकों को दोबारा से बनाने को जरूरी बताया। DDA के एडिशनल कमिश्नर (प्लानिंग) को 31 अगस्त को संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर व्यावहारिक समाधान निकालने का निर्देश दिया गया है।

लेखक के बारे मेंप्राची यादवलगभग 19 साल से पत्रकारिता में हैं। सात साल तक एक दिल्ली-एनसीआर न्यूज चैनल में विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। प्रोग्रामिंग और एंकरिंग भी की। टीवी से ही लीगल रिपोर्टिंग की शुरुआत हुई। उस दौरान, जिला अदालतों और दिल्ली हाई कोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट तक की रिपोर्टिंग की। 2013 में नवभारत टाइम्स से जुड़ीं। यहां पर शुरुआत जिला अदालतों, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की रिपोर्टिंग से हुई। वर्तमान में अन्य सभी अदालतों के साथ दिल्ली हाई कोर्ट भी कवर कर रही हैं।... और पढ़ें

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