दिल्ली की अदालत ने साइबर ठगी के आरोपी को दुबई यात्रा की मंजूरी दी
राउज एवेन्यू अदालत ने साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी को दुबई जाने की अनुमति दी है, साथ ही कई सख्त शर्तें भी लगाई हैं। अदालत ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार मौलिक है और इसे केवल आशंकाओं के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6a6b50463873c390e40d6662","slug":"rouse-avenue-court-grants-permission-to-cyber-fraud-accused-to-travel-to-dubai-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-148307-2026-07-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: राउज एवेन्यू अदालत ने साइबर ठगी आरोपी को दुबई जाने की अनुमति दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: राउज एवेन्यू अदालत ने साइबर ठगी आरोपी को दुबई जाने की अनुमति दी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- निचली अदालत का आदेश रद्द, सख्त शर्तों के साथ सात दिन की विदेश यात्रा मंजूर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी राजीव बुधिराजा को दुबई जाने की अनुमति देने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) ज्योति क्लेर ने कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी आरोपी का विदेश में कारोबार है, उसे फ्लाइट रिस्क नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार है और इसे केवल आशंकाओं के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने राजीव को सात दिन के लिए दुबई जाने की अनुमति देते हुए कई सख्त शर्तें लगाई हैं। अदालत ने कहा कि अपराध से जुड़े बिटकॉइन पहले ही प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक किए जा चुके हैं और डिजिटल साक्ष्य सीबीआई के कब्जे में हैं। इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर विदेश यात्रा के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
हालांकि, जांच एजेंसी की आशंकाओं को देखते हुए अनुमति सख्त शर्तों के साथ दी गई है। आदेश के अनुसार, राजीव को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती के साथ यात्रा का पूरा कार्यक्रम अदालत में देना होगा। उन्हें पांच लाख रुपये की एफडीआर जमा करनी होगी, पत्नी और मां के पासपोर्ट अदालत में जमा कराने होंगे तथा भारत लौटने के दो दिन के भीतर अदालत को इसकी सूचना देनी होगी। साथ ही, किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न करने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त का भी पालन करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू स्थित विशेष न्यायाधीश की अदालत ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक मामले में आरोपी राजीव बुधिराजा को दुबई जाने की अनुमति देने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) ज्योति क्लेर ने कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी आरोपी का विदेश में कारोबार है, उसे फ्लाइट रिस्क नहीं माना जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार है और इसे केवल आशंकाओं के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता। अदालत ने राजीव को सात दिन के लिए दुबई जाने की अनुमति देते हुए कई सख्त शर्तें लगाई हैं। अदालत ने कहा कि अपराध से जुड़े बिटकॉइन पहले ही प्लेटफॉर्म पर ब्लॉक किए जा चुके हैं और डिजिटल साक्ष्य सीबीआई के कब्जे में हैं। इसलिए केवल आशंकाओं के आधार पर विदेश यात्रा के अधिकार पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
विज्ञापन
हालांकि, जांच एजेंसी की आशंकाओं को देखते हुए अनुमति सख्त शर्तों के साथ दी गई है। आदेश के अनुसार, राजीव को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती के साथ यात्रा का पूरा कार्यक्रम अदालत में देना होगा। उन्हें पांच लाख रुपये की एफडीआर जमा करनी होगी, पत्नी और मां के पासपोर्ट अदालत में जमा कराने होंगे तथा भारत लौटने के दो दिन के भीतर अदालत को इसकी सूचना देनी होगी। साथ ही, किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न करने और गवाहों को प्रभावित न करने की शर्त का भी पालन करना होगा।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिल गेट्स ने चेतावनी दी: गलत हाथों में एआई से 100 करोड़ जीवन का खतरा, सरकार से कड़े नियमों की माँग

कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा: डिजिटल क्षेत्र में जातिगत गाली पर आपराधिक कार्रवाई संभव

दिल्ली HC: मुस्लिम वैवाहिक शादियों से POCSO का अपवाद नहीं

सुप्रीम कोर्ट में लॉ छात्र अक्षत त्रिपाठी की नई याचिका, यूपी सरकार पर भ्रामक जानकारी का आरोप

चुनाव आयोग का फ़ॉर्म‑६ बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट का समर्थन कथन विवादास्पद

उत्तरी प्रदेश सरकार ने कोर्ट को गुमराह किया, नोटिस देने वाले कार्यकारी मैजिस्ट्रेट को निलंबित नहीं किया: लॉ छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

सुप्रीम कोर्ट ने EC नियुक्ति विधि पर विभाजित रुख अपनाया: क्या बदलेगा चुनावी स्वतंत्रता?

संवैधानिक न्यायालय ही लगा सकते हैं संशोधित आजीवन कारावास, ट्रायल कोर्ट नहीं: सुप्रीम कोर्ट
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जमानत में न्यायाधीश नहीं थोप सकते निजी नैतिकता
- सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक ऊर्जा मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार शिकायत को खारिज करने वाले हाई कोर्ट आदेश को बरकरार रखा, भाजपा MLA की अपील खारिज
- उच्च न्यायालय ने SGPC कर्मचारियों की बर्खास्तगी को उलट दिया, पाया 'भुकी' की पुनःप्राप्ति का सबूत अप्रमाणित
- बिल गेट्स की चेतावनी: अनियंत्रित AI से हो सकता है 100 करोड़ मौतों का जोखिम
- गोवा में धर्म‑परिवर्तन बिल को मिली आंतरिक विरोध से ठप्पी
- दिल्ली में ट्रैफ़िक चालान निपटाने का सुनहरा मौका: 25 अक्टूबर को लोक अदालत
- कर्नाटक के डीजीपी ने सेक्शन 35 बीएनएसएस के कड़ाई से पालन के लिए निर्देश जारी, पुलिस को व्यक्तिगत जवाबदेही की चेतावनी
- सुप्रीम कोर्ट ने फाइटर पायलट की विधवा को वायु सेना में पुनः भर्ती का आदेश दिया

