E20 पेट्रोल से चलती कार बंद होने पर कोर्ट ने मारुति को दिया बड़ा झटका
एक ग्राहक की मारुति ग्रैंड विटारा कार ई20 पेट्रोल से चलते ही बंद हो गई, जिसके बाद कोर्ट ने मारुति को आदेश दिया कि वे नई कार दें या पैसे लौटाएं. मारुति इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत जाने की तैयारी में है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
E20 पेट्रोल से बंद हुई ₹20 लाख की Maruti कार; कोर्ट ने कहा पैसे लौटाओ, कंपनी बोली- हम जाएंगे ऊपरी अदालत
E20 पेट्रोल से मारुति कार बंद होने पर कोर्ट ने पैसे लौटाने को कहा, पर कंपनी सबूत नजरअंदाज करने का आरोप लगा ऊपरी अदालत जाएगी.
Published : July 17, 2026 at 12:01 PM IST
नई दिल्ली: रायपुर की जिला उपभोक्ता अदालत ने मारुति सुजुकी इंडिया और उसके स्थानीय डीलर को एक बड़ा झटका दिया है. अदालत ने कंपनी को आदेश दिया है कि वे डॉक्टर प्रेमराज देबता नाम के एक ग्राहक की 'ग्रैंड विटारा' कार को बदलकर नई E20 फ्यूल (20% इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल) अनुकूल कार दें. अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे ग्राहक को कार की पूरी कीमत यानी 20,50,494 रुपये वापस करने होंगे. इसके साथ ही, मानसिक परेशानी के लिए 1 लाख रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 10,000 रुपये का मुआवजा भी देना होगा. इस आदेश को पूरा करने के लिए कंपनी को 45 दिनों का समय मिला है, ऐसा न करने पर 7% सालाना ब्याज भी देना होगा.
क्या है पूरा मामला?
ग्राहक ने जून 2024 में मारुति ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार खरीदी थी. यह कार जनवरी 2023 में बनी थी. ग्राहक का आरोप है कि जब उन्होंने बाजार में मिलने वाला E20 पेट्रोल कार में डाला, तो कार बार-बार बंद होने लगी. कार के इंजन में खराबी आने लगी और डैशबोर्ड पर चेतावनियां दिखने लगीं. इसके बाद कार को कई बार सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा और फ्यूल टैंक की सफाई करवानी पड़ी. ग्राहक का कहना है कि उन्हें बिना सही जानकारी दिए ऐसी कार बेची गई जो E20 ईंधन के लायक नहीं थी.
मारुति सुजुकी का क्या है कहना?
इस मामले पर मारुति सुजुकी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह उपभोक्ता अदालत के इस फैसले को स्वीकार नहीं करती और इसके खिलाफ उच्च फोरम (राज्य उपभोक्ता आयोग) में अपील करेगी. कंपनी ने साफ शब्दों में कहा है कि जो कार ग्राहक को बेची गई थी, वह पूरी तरह से E20 पेट्रोल पर चलने के लिए ही बनाई गई थी. इसकी जानकारी कार के साथ मिलने वाली यूजर मैनुअल में भी साफ-साफ लिखी हुई है.
कंपनी का दावा है कि जब उन्होंने कार से पेट्रोल का सैंपल लेकर लैब में जांच कराई, तो उसमें ईंधन संदूषण (फ्यूल मिलावट या गंदगी) के सबूत मिले. मारुति का कहना है कि इंजन में खराबी गाड़ी की किसी तकनीकी कमी या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट की वजह से नहीं, बल्कि खराब और मिलावटी पेट्रोल के कारण आई थी. कंपनी का यह भी आरोप है कि जिला अदालत ने उनके द्वारा पेश किए गए कई जरूरी सबूतों और तथ्यों को अपने फैसले में शामिल नहीं किया है.
यह भी पढ़ें- 'हमारी 10 साल से भी ज्यादा पुरानी गाड़ी E20 कम्पैटिबल', Bajaj Auto का बड़ा बयान
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