गौहाटी हाई कोर्ट ने असम में निजी कृषि ज़मीनों पर बुलडोजर कार्रवाई को दुरुपयोग मानते हुए सरकार से जवाब मांगा
कोर्ट ने कहा कि गोलपारा जिले में निजी कृषि भूमि पर 21 मुस्लिम मालिकों के घरों को ध्वस्त करने में तत्काल खतरा नहीं था और यह आपदा प्रबंधन अधिनियम एवं कृषि भूमि अधिनियम का दुरुपयोग दर्शाता है। अधिकारियों को हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया गया और 13 अक्टूबर को अगली सुनवाई में यदि कार्रवाई अवैध पाई गई तो मुआवजे पर निर्णय होगा।

सौजन्य से:- Jagran
'निजी कृषि भूमि पर बुलडोजर कार्रवाई कानून का दुरुपयोग', हाई कोर्ट ने असम सरकार से मांगा जवाब
गौहाटी हाई कोर्ट ने गोलपारा में निजी कृषि भूमि पर 21 आवासीय इकाइयों को ध्वस्त करने पर असम प्रशासन की ...और पढ़ें
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पीटीआई, गुवाहाटी। गौहाटी हाई कोर्ट ने असम प्रशासन से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह गोलपारा जिले में निजी कृषि भूमि पर 21 आवासीय इकाइयों को ध्वस्त करते समय कानून का दुरुपयोग कर रहा है। मामले में सभी याचिकाकर्ता मुसलमान हैं और हाई कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की है।
सितंबर की शुरुआत में अपनी कृषि भूमि पर स्थित घरों को ध्वस्त करने के खिलाफ 21 मुस्लिम याचिकाकर्ताओं की सुनवाई करते हुए जस्टिस देवाशीष बरुआह ने कहा कि प्रथमदृष्टया, यह दर्शाता है कि इस तरह की कठोर कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं था।
11 सितंबर को पारित आदेश में कहा गया,"बल्कि, यह भी आपदा प्रबंधन विभाग अधिनियम, 2005 का दुरुपयोग है।"
हाई कोर्ट ने जिला आयुक्त और सर्कल अधिकारी को कार्यवाही के संबंध में हलफनामे दायर करने का अवसर दिया। जस्टिस बरुआह ने याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अतिरिक्त हलफनामे का भी उल्लेख किया, जिसमें ध्वस्तीकरण की गई तस्वीरें और हुए नुकसान को रिकार्ड में लाया गया है।
न्यायाधीश ने अधिकारियों से इस अतिरिक्त हलफनामे का उत्तर दाखिल करने के लिए कहा, जिसके बाद अदालत यह तय करेगी कि यदि जिला आयुक्त और सर्कल अधिकारी द्वारा की गई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कानूनन अवैध पाई जाती है, तो पीड़ितों के लिए मुआवजे पर निर्णय लिया जाएगा।
पांच सितंबर को गोलपारा के मातिया के सर्कल अधिकारी ने नोटिस जारी किए जिसमें मालिकों से कहा गया कि वे 24 घंटे के भीतर अपने घरों को ध्वस्त करें या कानूनी कार्रवाई का सामना करें। सात सितंबर की सुबह 21 याचिकाकर्ताओं के आवासीय इकाइयों को ध्वस्त कर दिया गया, जो सभी मुस्लिम हैं।
अदालत ने असम कृषि भूमि (गैर-कृषि उद्देश्य के लिए पुनर्वर्गीकरण और हस्तांतरण का विनियमन) अधिनियम, 2015 का उल्लेख किया, जिसके तहत एक बीघा से अधिक कृषि भूमि के निर्माण के लिए किसी भी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, बशर्ते निर्माण दो मंजिला तक सीमित हो। सर्कल अधिकारी के नोटिसों में पट्टे याचिकाकर्ताओं के स्वामित्व में दिखाए गए थे।
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