रॉयल कॉलेज पर बीकॉम प्रवेश में धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज किया
गाजियाबाद की सिविल जज अर्पिता यादव ने बलबीर सिंह गोगिया के प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में स्वीकार कर 29 सितंबर को सुनवाई तय की, पुलिस जांच की आवश्यकता नहीं पाई।

सौजन्य से:- Amar Ujala
{"_id":"6aa8560076663e66620c614a","slug":"royal-college-accused-of-fraud-court-registers-complaint-as-a-formal-petition-ghaziabad-news-c-30-gbd1036-977186-2026-09-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ghaziabad News: रॉयल कॉलेज पर धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज की शिकायत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ghaziabad News: रॉयल कॉलेज पर धोखाधड़ी का आरोप, अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज की शिकायत
विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद। रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए दाखिल प्रार्थनापत्र को अदालत ने परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्पिता यादव की अदालत ने मामले में पुलिस से जांच कराने की जरूरत नहीं मानी। अदालत ने परिवाद के तहत मामले की सुनवाई करते हुए बयान के लिए 29 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
बलबीर सिंह गोगिया ने अदालत में दाखिल प्रार्थनापत्र में रॉयल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और उससे जुड़े पदाधिकारियों पर उनके बेटे के बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। बलबीर के अनुसार उनका बेटा नवजीत सिंह गोगिया वर्ष 2024-25 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश के लिए प्रयास कर रहा था। इसी दौरान रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को कॉलेज में प्रवेश के दौरान दो लाख रुपये दान और 25 हजार रुपये प्रवेश व पंजीकरण शुल्क के नाम पर लिए गए। इसके बाद यूनिफॉर्म के लिए आठ हजार रुपये भी लिए गए। आरोप है कि कॉलेज की ओर से प्रवेश और अन्य प्रक्रिया से संबंधित रसीद, आई कार्ड और लाइब्रेरी कार्ड जारी किए गए और उनका बेटा नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाई करता रहा। बाद में परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश नहीं होने की जानकारी दी। प्रार्थी का आरोप है कि इस संबंध में जानकारी मांगने पर कॉलेज की ओर से अतिरिक्त रकम की मांग की गई और शिकायत करने पर धमकियां भी दी गईं। उन्होंने पुलिस और कई उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। अदालत ने प्रार्थनापत्र और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
-- -- -- -
बलबीर सिंह गोगिया ने अदालत में दाखिल प्रार्थनापत्र में रॉयल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट और उससे जुड़े पदाधिकारियों पर उनके बेटे के बीकॉम में प्रवेश के नाम पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। बलबीर के अनुसार उनका बेटा नवजीत सिंह गोगिया वर्ष 2024-25 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश के लिए प्रयास कर रहा था। इसी दौरान रॉयल कॉलेज में बीकॉम में प्रवेश के लिए संपर्क किया गया। आरोप है कि 29 जुलाई 2025 को कॉलेज में प्रवेश के दौरान दो लाख रुपये दान और 25 हजार रुपये प्रवेश व पंजीकरण शुल्क के नाम पर लिए गए। इसके बाद यूनिफॉर्म के लिए आठ हजार रुपये भी लिए गए। आरोप है कि कॉलेज की ओर से प्रवेश और अन्य प्रक्रिया से संबंधित रसीद, आई कार्ड और लाइब्रेरी कार्ड जारी किए गए और उनका बेटा नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाई करता रहा। बाद में परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने प्रवेश नहीं होने की जानकारी दी। प्रार्थी का आरोप है कि इस संबंध में जानकारी मांगने पर कॉलेज की ओर से अतिरिक्त रकम की मांग की गई और शिकायत करने पर धमकियां भी दी गईं। उन्होंने पुलिस और कई उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। अदालत ने प्रार्थनापत्र और उपलब्ध अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद कहा कि मामले में पुलिस जांच की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

बबेरू के दूकानदारों को सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश, विवाद में मिली राहत

तेलंगाना हाईकोर्ट ने SRSP विस्थापित महिला को कृषि भूमि न मिलने पर सरकार को किया कड़ा सवाल

फु क्वोक में छात्र मॉक ट्रायल से कानूनी ज्ञान और सामाजिक कौशल हासिल करते हैं

हाईकोर्ट ने किठौर मामले में आरोपी की जमानत अस्वीकृत, गवाहों पर दबाव की सम्भावना को प्राथमिकता दी

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को सील‑ध्वस्त करने का आदेश दिया

हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को चेतावनी: इलाज में देरी नहीं, २५,००० रुपये जुर्माना

MP उच्च न्यायालय में याचिकाओं से टैक्स ऑडिट डेडलाइन पर बढ़े प्रश्न
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को विवादास्पद नागरिकता डेटाबेस के उपयोग की स्वीकृति दी
- सुप्रीम कोर्ट ने SAVE डेटाबेस के इस्तेमाल को मंजूरी दी, ट्रम्प प्रशासन को राहत
- कानून का सही उपयोग: बहादुरपुर में एससी-एसटी अधिनियम पर बैठक
- सुप्रीम कोर्ट ने हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने की याचिका खारिज की, आदेश से नहीं थोप सकते भाषा
- एपी हाई कोर्ट ने अमरावती को राजधानी मानने के बाद तीन‑राजधानी प्रस्ताव को निरर्थक घोषित किया
- सुप्रीम कोर्ट ने क्यों नहीं रोका SIR?
- महिला पहलवानों ने बृजभूषण सिंह की बरी को चुनौती, दिल्ली कोर्ट में दायर की अपील
- ICU सुधार में नया कदम: कोर्ट ने बुनियादी ढाँचा 9 महीने, स्टाफिंग 6 महीने में पूरा करने का आदेश

