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तमिलनाडु सरकार के खिलाफ SC में HC के फैसले की चुनौती

तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें कहा गया था कि इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति सिर्फ धर्म बदलने के आधार पर पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) कैटेगरी के तहत आरक्षण का दावा नहीं करता है.

8 जुलाई 2026 को 02:57 pm बजे
तमिलनाडु सरकार के खिलाफ SC में HC के फैसले की चुनौती

सौजन्य से:- ETV Bharat

इस्लाम अपनाने वालों को कोटा का फायदा देने से मना करने वाले HC के फैसले के खिलाफ SC पहुंची तमिलनाडु सरकार

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के मुस्लिम आरक्षण के फैसले को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. इस पर राज्य सरकार एससी पहुंच गई है.

By Sumit Saxena

Published : July 8, 2026 at 7:22 PM IST

नई दिल्ली : तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें कहा गया था कि इस्लाम अपनाने वाला व्यक्ति सिर्फ धर्म बदलने के आधार पर पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) कैटेगरी के तहत आरक्षण का दावा करने का हकदार नहीं है.

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है, जिसमें 9 मार्च, 2024 को जारी सरकारी आदेश (GO) को गैर-संवैधानिक घोषित किया गया था.

हाई कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने सरकारी आदेश को रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट दोनों के कानूनी उदाहरणों के खिलाफ है.

विवादित सरकारी आदेश में पिछड़े वर्ग (BC), सबसे पिछड़े वर्ग (MBC), विमुक्त समुदाय (DNC), या अनुसूचित जाति (SC) के लोगों को, जिन्होंने बाद में इस्लाम धर्म अपना लिया था, पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) माना गया था और आरक्षण का फ़ायदा उठाने के लिए सात नोटिफाइड मुस्लिम समुदायों में से किसी एक के तहत कम्युनिटी सर्टिफिकेट लेने की इजाजत दी गई थी.

हाई कोर्ट ने कहा कि इस्लाम अपनाने वाले व्यक्ति को सिर्फ मुस्लिम माना जा सकता है और सिर्फ धर्म बदलने की वजह से उसे रिजर्वेशन के लिए किसी खास नोटिफाइड बैकवर्ड क्लास मुस्लिम कम्युनिटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता.

यह फैसला समीर अहमद की याचिका पर सुनाया गया, जिन्होंने 2015 में हिंदू धर्म से इस्लाम धर्म अपना लिया था. इसके बाद उन्होंने इस्लामी रीति-रिवाजों से शादी की और रिजर्वेशन का फायदा उठाने के लिए "मुस्लिम लेब्बाई" समुदाय से होने का सर्टिफिकेट मांगा. तहसीलदार ने उनके आवेदन को रिजेक्ट कर दिया. अहमद ने अपनी आवेदन रिजेक्ट होने के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

ये भी पढ़ें- प्राइवेट स्कूल कितनी फीस ले रहे हैं नोटिस बोर्ड पर बताएं, मद्रास हाई कोर्ट का सख्त आदेश

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