सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण के हाईकोर्ट के आदेश पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सरकार को अनुबंध पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवाओं को नियमित करने का निर्देश दिया गया था।

सौजन्य से:- Amar Ujala
Himachal News: अनुबंध कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियमित करने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम रोक
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 24 अगस्त 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए एकल जज के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें 3 साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियमित करने के आदेश दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सरकार को सोसायटी और कैम्पा के तहत अनुबंध पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवाओं को नियमित करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रतिवादी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 24 अगस्त 2026 तक जवाब दाखिल करने को कहा है। हाईकोर्ट की खंडपीठ राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए एकल जज के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें 3 साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों को नियमित करने के आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ये कर्मचारी पिछले 22 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सरकार की ओर से बार-बार इनका कार्यकाल बढ़ाया जाना इनके मन में नियमित होने की एक स्वाभाविक और जायज उम्मीद जगाता है। राज्य सरकार का शुरुआत से ही यह रुख रहा है कि ये कर्मचारी सीधे वन विभाग के नहीं, बल्कि अपर सतलुज वैली वॉटरशेड डेवलपमेंट सोसायटी और बाद में कैम्पा के तहत अनुबंध पर रखे गए थे।
ये संस्थाएं स्वायत्त हैं। इनके कर्मचारियों को सीधे सरकारी विभागों में नियमित नहीं किया जा सकता। इन कंप्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्ति मार्च 2004 में रोजगार कार्यालय के माध्यम से और बाकायदा इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद हुई थी। साल 2012 में सोसायटी बंद होने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। बाद में इन्हें कैम्पा के तहत रखा गया।
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