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सुप्रीम कोर्ट ने धारा 147A को रद्द करने वाले हाईकोर्ट फैसले पर रोक दी

केन्द्र सरकार की स्पेशल लीव पिटिशन पर सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब‑हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 147A को असंवैधानिक बताया गया था। उच्चतम न्यायालय ने इस रोक को मुख्य मामले के अंतिम निपटारे तक बरकरार रखने का आदेश दिया और सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को निर्धारित की। यह विवाद ज्यूरीस्डिक्शनल असेसिंग ऑफिसर और नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर के अधिकार क्षेत्र तथा सेक्शन 148‑148A के तहत री‑असेसमेंट प्रक्रियाओं को लेकर है।

18 सितंबर 2026 को 11:04 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने धारा 147A को रद्द करने वाले हाईकोर्ट फैसले पर रोक दी

सौजन्य से:- Live Law Hindi

सुप्रीम कोर्ट ने Income Tax Act की धारा 147A रद्द करने वाले फ़ैसले पर लगाई रोक

Shahadat

18 Sept 2026 2:05 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फ़ैसले पर रोक लगाई। हाईकोर्ट ने इस फ़ैसले में इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) की धारा 147A को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने केंद्र सरकार की स्पेशल लीव पिटिशन (विशेष अनुमति याचिका) के अंतिम निपटारे तक इस फ़ैसले पर रोक लगाई।

कोर्ट ने आदेश दिया:

"हाईकोर्ट के विवादित फ़ैसले और आदेश पर तब तक रोक रहेगी, जब तक मुख्य मामले का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता। अंतिम सुनवाई के लिए 3 दिसंबर, 2026 की तारीख तय की गई।"

दो दिन पहले, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के सामने मामले को जल्द लिस्ट करने का अनुरोध किया, और आज (शुक्रवार) इसे लिस्ट किया गया।

यह मामला ज्यूरिस्डिक्शनल असेसिंग ऑफिसर (JAO) और फेसलेस असेसिंग ऑफिसर/नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर (NFAC) के अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है।

फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के तहत यह सवाल उठा कि क्या JAO स्वतंत्र रूप से सेक्शन 148 के तहत री-असेसमेंट नोटिस जारी कर सकते हैं। धारा 148A के तहत आदेश पारित कर सकते हैं, या क्या ये काम तय फेसलेस सिस्टम के ज़रिए किए जाने चाहिए। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट समेत कई हाई कोर्ट्स ने 'इनकम टैक्स ऑफिसर, वार्ड 2(1), चंडीगढ़ बनाम तेज प्रताप सिंह' मामले में कहा कि फेसलेस प्रक्रिया का उल्लंघन करके JAO द्वारा शुरू की गई री-असेसमेंट की कार्यवाही अमान्य थी। दूसरे हाई कोर्ट्स की राय इससे अलग थी।

इसके बाद संसद ने 1 अप्रैल, 2021 से लागू होने वाला धारा 147A जोड़ा ताकि यह साफ़ किया जा सके कि धारा 148 और 148A में "असेसिंग ऑफिसर" शब्द का मतलब नेशनल फेसलेस असेसमेंट सेंटर के अलावा किसी अन्य असेसिंग ऑफिसर से है। वास्तव में, इस संशोधन का मकसद यह स्थापित करना था कि अधिकार क्षेत्र वाले अधिकारी (ज्यूरिस्डिक्शनल ऑफिसर्स) ये री-असेसमेंट कार्यवाही कर सकते हैं।

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि विधायिका (लेजिस्लेचर) सिर्फ़ यह घोषित नहीं कर सकती कि कोई खास कानूनी स्थिति हमेशा से मान्य थी, जबकि संवैधानिक अदालतों ने पहले ही संबंधित प्रक्रिया को कानूनी रूप से दोषपूर्ण पाया हो। कोर्ट ने कहा कि संशोधन का मकसद संवैधानिक अदालतों के निष्कर्षों को गलत तरीके से दरकिनार करना था।

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