अकाल तख्त का पंजाब सरकार को अल्टीमेटम, बेअदबी कानून पर आम सहमति तक विधानसभा में न हो चर्चा
पंजाब सरकार के जवाब को अकाल तख्त साहिब ने अस्वीकार कर दिया है, साथ ही एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया है जो कानून पर आम सहमति बनाने का प्रयास करेगी. सरकार से दो महीने के भीतर सहमति बनाने को कहा गया है.

सौजन्य से:- AajTak
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श्री अकाल तख्त साहिब ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी रोकने के लिए प्रस्तावित कानून पर पंजाब सरकार के जवाब को अस्वीकार कर दिया है. अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने कहा कि सरकार की तरफ से भेजा गया जवाब संतोषजनक नहीं है और इसमें 29 जून को अकाल तख्त में बनी सहमति की भावना नहीं दिखती.
जत्थेदार ने कहा कि अकाल तख्त की तरफ से उठाई गई आपत्तियों में से सरकार ने सिर्फ एक पॉइंट ही स्वीकार किया है, जबकि बाकी मुद्दों पर उसने अपना रुख नहीं बदला. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जवाब भेजने से पहले किसी तरह का समन्वय भी नहीं किया.
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इसी के साथ श्री अकाल तख्त साहिब ने कानून पर आम सहमति बनाने के लिए छह सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है. इस समिति में रिटायर्ड जज जस्टिस रूपिंदर सिंह सोढ़ी, जस्टिस मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, वरिष्ठ वकील पूरन सिंह हुंडल, सिख विद्वान डॉक्टर केहर सिंह पटियाला, प्रोफेसर जगमोहन सिंह लुधियाना और समन्वयक के रूप में एसजीपीसी चंडीगढ़ कार्यालय के सचिव लखवीर सिंह शामिल हैं. अकाल तख्त ने पंजाब सरकार से कहा है कि वह इस समिति के साथ बातचीत कर दो महीने के भीतर कानून पर सहमति बनाए.
जत्थेदार ने बताया सरकार के अधिकार क्षेत्र में क्या नहीं
जत्थेदार गर्गज्ज ने कहा कि सरकार सिर्फ बेअदबी के दोषियों के लिए सख्त सजा तय कर सकती है, लेकिन "कस्टोडियन" तय करना, गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को यूनिक नंबर देना, उनका रिकॉर्ड वेबसाइट पर अपलोड करना या केंद्रीय रजिस्टर बनाना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. उन्होंने कहा कि ये सभी धार्मिक और प्रशासनिक विषय एसजीपीसी के अधिकार क्षेत्र के हैं.
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जत्थेदार ने यह भी कहा कि सरकार की व्याख्या में गंभीर खामियां हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बेअदबी के लिए उकसाता है तो उसे "कस्टोडियन" मानने की बात कानून की मूल भावना से मेल नहीं खाती. साथ ही उन्होंने मांग की कि फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए बेअदबी मामलों की सुनवाई का प्रावधान कानून में स्पष्ट रूप से जोड़ा जाए.
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3 अगस्त से शुरू हो रहा पंजाब विधानसभा का सत्र
अकाल तख्त ने सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों से भी अपील की है कि 3 अगस्त से शुरू हो रहे पंजाब विधानसभा सत्र में तब तक इस कानून पर कोई चर्चा या संशोधन स्वीकार न किया जाए, जब तक श्री अकाल तख्त और एसजीपीसी के साथ पूर्ण सहमति न बन जाए.
जत्थेदार ने सरकार से यह भी पूछा कि वह किन "गुप्त सलाहकारों" से सलाह ले रही है. साथ ही उन्होंने 2015 के बेअदबी मामलों में न्याय दिलाने, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गिरफ्तारी और लंबित मामलों में कार्रवाई तेज करने की भी मांग की.
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