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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनिंग से रोकने के लिए ज्ञापन पर सवाल उठाए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आईपीएस अधिकारी शारीरिक रूप से फिट हैं तो उन्हें ट्रेनिंग से क्यों रोका जा रहा है। कोर्ट ने गृह मंत्रालय के 1993 के ज्ञापन की आलोचना की, जिसमें बच्चे के जन्म के बाद महिला आईपीएस प्रोबेशनर को एक साल तक ट्रेनिंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

8 जुलाई 2026 को 06:58 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनिंग से रोकने के लिए ज्ञापन पर सवाल उठाए

सौजन्य से:- Hindustan

आईपीएस अधिकारी फिट हैं तो ट्रेनिंग से क्यों रोक रहे : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय के 1993 के ज्ञापन की आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि जन्म के बाद महिला आईपीएस प्रोबेशनर को एक साल तक ट्रेनिंग नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारी शारीरिक रूप से फिट हैं, तो उन्हें ट्रेनिंग से क्यों रोका जा रहा है। यह मामला एक महिला आईपीएस अधिकारी की याचिका पर आधारित है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गृह मंत्रालय के 1993 के एक कार्यालय ज्ञापन की एक सख्त व्याख्या पर नाराजगी जताई। ज्ञापन में कहा गया था कि बच्चे के जन्म के बाद महिला आईपीएस प्रोबेशनर को एक साल तक ट्रेनिंग करने की अनुमति नहीं दी जाती। शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि कोई अधिकारी शारीरिक रूप से फिट है तो उन्हें ट्रेनिंग से क्यों रोका जा रहा है? जस्टिस मनोज मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि इस ज्ञापन को महिला के हित में पढ़ा जाना चाहिए, न कि उसके खिलाफ, जैसा कि इस मामले में किया गया। यह ज्ञापन इसलिए बनाया गया था ताकि महिला आईपीएस अधिकारी को प्रोबेशन के दौरान शारीरिक ट्रेनिंग करने के लिए मजबूर न किया जाए।

पीठ ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि जो अधिकारी मेडिकल रूप से फिट हैं और ट्रेनिंग शुरू करना चाहती हैं, उसे एक साल पूरा होने से पहले ट्रेनिंग करने से रोक दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट यह टिप्पणी 2023 बैच की एक महिला आईपीएस अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। अधिकारी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी के उस फैसले को सही माना गया था, जिसमें उसे फेज-II ट्रेनिंग में शामिल करने से इनकार कर दिया गया था।

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