अदालत ने शिकायतकर्ता को परिवाद में तबादले का आदेश दिया
गाजियाबाद में एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में अदालत ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के बजाय शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता को अदालत में अपने सभी साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे।

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
अदालत ने शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिया
गाजियाबाद। अदालत ने लोनी थाना क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में पुलिस
गाजियाबाद। अदालत ने लोनी थाना क्षेत्र में एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देने के बजाय शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता को अदालत में अपने सभी साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे। अदालत से मिली जानकारी के अनुसार रहीसमुद्दीन ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि वह और आरिफ पहले साथ में कारोबार करते थे। आरिफ ने उनसे करीब एक लाख रुपये उधार लिए थे। बाद में 14 नवंबर 2025 को उनके बेटे अहाद का निकाह आरिफ की बेटी शहनाज से हुआ।शिकायतकर्ता का कहना है कि निकाह के कुछ दिन बाद जब उन्होंने अपने रुपये वापस मांगे तो आरिफ नाराज हो गया और अपनी बेटी को अपने साथ ले गया।
इसके बाद फोन पर पांच लाख रुपये की मांग की जाने लगी तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।शिकायत में कहा गया कि 22 मार्च 2026 को शहनाज की मां ने समझौते और बेटी को वापस भेजने की बात कहकर रहीसमुद्दीन और उनके बेटे को अपने घर बुलाया। आरोप है कि वहां पहुंचते ही आरिफ समेत अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की और कमरे में बंद कर दिया। उनपर पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया।शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि बाद में उनके रिश्तेदारों के पहुंचने पर उनसे दो लाख रुपये छीन लिए गए और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया। अब अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश देते हुए शिकायतकर्ता के बयान के लिए 29 जुलाई की तारीख नियत की है।
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