वायु सेना के जवान अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकते: सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने वायु सेना के जवानों को असैन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने के अधिकार पर रोक लगा दी है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि नौकरी छोड़ने के लिए पहले से मंजूरी लेना एक अनिवार्य प्रक्रिया है।

सौजन्य से:- Hindustan
अपनी मर्जी से नौकरी नहीं छोड़ सकते वायु सेना के जवान, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट में वायुसेना कर्मियों को असैन्य पदों पर नियुक्ति से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई हुई। वायुसेना के कॉरपोरल नखत सिंह की तरफ से यह याचिका दाखिल की गई थी। उन्होंने एक असैन्य पद के लिए आवेदन किया था।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक अहम फैसले में कहा कि भारतीय वायुसेना के कर्मियों को असैन्य पदों पर नियुक्ति के लिए अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ने का 'असीमित अधिकार' नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नौकरी छोड़ने के लिए पहले से मंजूरी लेना कोई मामूली औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, जिसे नजरअंदाज किया जा सके।
न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि अभियानगत तैयारी बनाए रखने के लिए पहले से अनुमति लेने की वायुसेना की निर्धारित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन किया जाना अनिवार्य है। पीठ ने वायुसेना के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित आवश्यकताएं केवल औपचारिक प्रक्रिया भर नहीं हैं, इसलिए उनपर अमल किया जाना जरूरी है।
क्या बोला सुप्रीम कोर्ट
फैसला लिखने वाला न्यायमूर्ति चंदुरकर ने कहा, 'इन आवश्यकताओं को तय करने का मकसद भारतीय वायुसेना से वायु योद्धाओं को समय से पहले सेवा मुक्त होने से रोकने के उद्देश्य से सीधे जुड़ा हुआ है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि एयरमैन भारतीय वायुसेना के सदस्य हैं, जो एक अनुशासित बल है।'
उन्होंने कहा, 'असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले अनुमति लेना और चयन के बाद सक्षम अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) हासिल करना कोई मामूली प्रक्रियात्मक आवश्यकता नहीं है, जिसे संबंधित एयरमैन अपनी मर्जी से नजरअंदाज कर सके।'
प्रोफेसर की जॉब के बाद दिया आवेदन
पीठ ने भारतीय वायुसेना के कॉरपोरल नखत सिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्रोफेसर (हिंदी) के पद पर चुने जाने के बाद उन्हें एनओसी जारी किए जाने और सेवा से मुक्त किए जाने का अनुरोध किया था। वायुसेना में सात साल की सेवा पूरी करने वाले सिंह ने नवंबर 2020 में जारी भर्ती विज्ञापन के बाद एक असैन्य पद के लिए आवेदन किया था।
सेवा मुक्त करने का आदेश क्यों हुआ खारिज
हालांकि, वह भर्ती परीक्षा और साक्षात्कार में सफल रहे थे, लेकिन एयर ऑफिसर कमांडिंग ने अक्टूबर 2022 में एनओसी जारी किए जाने और सेवा से मुक्त किए जाने का उनका आवेदन खारिज कर दिया था। एयर ऑफिसर कमांडिंग ने वायुसेना के 2017 के आदेश का हवाला दिया था, जिसके तहत किसी एयरमैन के लिए असैन्य पद के लिए आवेदन करने से पहले सक्षम अधिकारियों से पूर्व अनुमति लेनी जरूरी है।
एयर ऑफिसर कमांडिंग के फैसले के खिलाफ सिंह की अर्जी सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) और दिल्ली उच्च न्यायालय दोनों ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने शीर्ष अदालत का रुख किया था।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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