स्थाई लोक अदालत में विवादों का त्वरित निपटारा : एक बेहतर न्यायिक समाधान
स्थाई लोक अदालत मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए है, जिसमें दावे का मूल्य एक करोड़ रुपये तक हो सकता है। यहां अदालत का फैसला अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है और इसमें कोई कोर्ट फीस नहीं देनी पड़ती है।

सौजन्य से:- Live Hindustan
स्थाई लोक अदालत में सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं के विवाद का त्वरित निष्पादन : अध्यक्ष
झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से स्थायी लोक अदालत की कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें न्यायिक मंच के तहत विवाद समाधान की प्रक्रिया पर चर्चा की गई। स्थायी लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सस्ता और त्वरित न्याय प्रदान करना है। यहां समान मूल्य के मामले सुने जाते हैं और अंतिम निर्णय बाध्यकारी होता है।
गोड्डा एक प्रतिनिधि। झारखंड विधिक सेवा प्राधिकरण व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर स्थायी लोक अदालत के तत्वावधान में सदर प्रखंड के मछिया सिमरडा पंचायत भवन में स्थायी लोक अदालत की भूमिका एवं कार्य विधि को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। संचालन अधिकार मित्र नवीन कुमार कर रहे थे।
कार्यशाला की अध्यक्षता
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष विजय कुमार पांडेय ने कहा कि स्थायी लोक अदालत एक विशेष न्यायिक मंच है। इसका गठन मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से संबंधित विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए किया गया है। लोक अदालत का उद्देश्य अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ को कम करना और आम नागरिकों को बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के सस्ता और त्वरित न्याय दिलाना है।
विवादों का निपटारा
स्थायी लोक अदालत में मुख्य रूप से बैंक ऋण विवाद, किसी भी सेवा में ऋुटि, सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं से जुड़े विवादों का निपटारा होता है। इनमें परिवहन सेवा, डाक, टेलीग्राफ या टेलीफोन सेवा, बिजली, प्रकाश या पानी की आपूर्ति, अस्पताल या औषधालय सेवा,बीमा सेवा, स्वच्छता या सफाई व्यवस्था से संबंधित विवाद का निपटारा होता है। स्थायी लोक अदालत केवल उन्हीं मामलों को सुन सकती है जहां दावे का मूल्य एक करोड़ रुपये तक हो।
निर्णय की प्रक्रिया
स्थाई लोक अदालत के सदस्य डा. नीरज कुमार ने कहा कि मामला दायर होने के बाद, अदालत का पहला प्रयास दोनों पक्षों के बीच सुलह कराकर समझौता कराना होता है। यदि सुलह नहीं हो पाती है, तो स्थायी लोक अदालत मामले के गुण-दोष के आधार पर अपना निर्णय सुना सकती है। स्थायी लोक अदालत का फैसला अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है। इसके विरुद्ध किसी भी अन्य अदालत में अपील नहीं की जा सकती।
सुविधाएं एवं लाभ
स्थाई लोक अदालत के सदस्य दिनकर कुमार ने कहा कि स्थाई लोक अदालत को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के तहत गवाहों को बुलाने, शपथ दिलाने और साक्ष्य लेने की शक्तिया प्राप्त हैं। यहां मुकदमा दायर करने के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं देनी पड़ती। अधिकार मित्र अविनाश सिंहा व मार्था टुडू ने कहा कि स्थायी लोक अदालत के उभय पक्षों को त्वरित त्वरित न्याय सुलभ होता है। नियमित अदालतों की लंबी तारीखों और जटिलताओं से मुक्ति मिलती है। आम आदमी बिना वकील के भी अपनी बात रख सकता है। आपसी समझौते से विवाद सुलझने पर दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट कम होती है। धन्यवाद ज्ञापन मुखिया विजय कुमार भगत ने किया।
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