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पुलिस ने कहा, पूर्व मुख्य न्यायाधीश राणा को हमला खतरे के कारण थाने में सुरक्षित किया, गिरफ्तारी नहीं हुई

नेपाल पुलिस ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा की गिरफ्तारी की खबर को नकारते हुए बताया कि उन्हें संभावित हमले की धमकी मिलने पर काठमांडू के थाने में ले जाया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष खड़का ने कहा कि सुरक्षा हेतु राणा को पुलिस गार्ड में ले जाकर थाने में रखा गया, जबकि धमकी के स्रोत का खुलासा नहीं किया गया।

27 सितंबर 2026 को 05:05 am बजे
पुलिस ने कहा, पूर्व मुख्य न्यायाधीश राणा को हमला खतरे के कारण थाने में सुरक्षित किया, गिरफ्तारी नहीं हुई

सौजन्य से:- Hindustan

नेपाल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश को थाने में रखा, पुलिस बोली- हमले का खतरा था, गिरफ्तार नहीं

नेपाल पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा को गिरफ्तार करने की खबरों का खंडन किया है। पुलिस ने बताया कि उनके ऊपर हमला करने की धमकी मिली थी। इसलिए उनको सुरक्षित करने के लिए थाने लाया गया है।

नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुबह उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी। अब इन खबरों को नेपाल पुलिस ने खंडन किया है। पुलिस की तरफ से कहा गया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश के ऊपर जानलेवा हमला होने की धमकी सामने आई थी। इसके बाद उन्हें काठमांडू स्थित थाने में लाया गया था। काठमांडू वैली इन्वेस्टिगेशन क्राइम के ऑफिस ने पुष्टि की कि राणा को टेकू स्थित उसके कार्यालय लाया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष खड़का ने बताया कि अधिकारियों को सूचना मिली थी कि राणा पर हमला हो सकता है, जिसके बाद उन्हें पुलिस सुरक्षा में लाया गया। हालांकि, अधिकारियों ने कथित धमकी के स्रोत की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। बता दें, इससे पहले जानकारी सामने आई थी कि चोलेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने उन्हें काठमांडू स्थित उनके घर से हिरासत में लिया। हालांकि, अब पुलिस ने इस पूरी खबर का खंडन किया है।

कौन हैं चोलेंद्र शमशेर राणा?

नेपाल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शरशेर राणा एक विवादास्पद नाम है। 2019 में मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद राणा ने तत्कालीन पीएम के.पी. सरमा ओली के संसद भंग किए जाने के फैसले को रद्द कर दिया था। उस समय उन्होंने तत्कालीन नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा का समर्थन किया। बाद में देउबा पीएम भी बने और केपी ओली के खिलाफ नेपाली कांग्रेस और माओवादियों के गठबंधन का नेतृत्व किया।

हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों के साथ उनका विवाद सामने आया। इसमें साथी न्यायाधीशों ने चोलेंद्र शमशेर राणा के ऊपर आरोप लगाए गए कि उन्होंने देउबा सरकार में अपने एक करीबी को मंत्री बनवाया है। कोर्ट के करीब 15 वकीलों ने उनके इस्तीफे की मांग की। लेकिन राणा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। बाद में उनके खिलाफ महाभियोग लाया गया और उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया।

निलंबित किए जाने के बाद शमशेर राणा का पेंशन वाला मामला सुप्रीम कोर्ट में जारी रहा। हाल ही में कोर्ट ने उनकी पेंशन और रिटायरमेंट से जड़े दूसरे सारे पेमेंट जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि भले ही राणा को निलंबित किया गया हो, लेकिन उनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही पूरी नहीं हुई थी। ऐसे में उनके भत्ते नहीं रोके जा सकते।

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