तमिलनाडु के पूर्व मंत्री को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तारी पर लगाई रोक
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. बालाजी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा और पासपोर्ट सरेंडर करना होगा.

सौजन्य से:- ETV Bharat
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तारी पर लगाई रोक
शीर्ष अदालत ने साफ किया कि बालाजी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा और पासपोर्ट सरेंडर करना होगा.
By Sumit Saxena
Published : July 31, 2026 at 4:26 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक वी. सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. यह मामला तमिलनाडु विजिलेंस (सतर्कता विभाग) द्वारा टीएएसएमएसी (TASMAC) में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है. शीर्ष अदालत ने साफ किया कि बालाजी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा, गवाहों को प्रभावित नहीं करना होगा और अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा.
इस मामले की सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने की. पीठ ने यह अंतरिम आदेश बालाजी की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी. कोर्ट ने उन्हें गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने से मना किया और पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया.
सुनवाई के दौरान बालाजी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसे एक "अजीब मामला" बताया. उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के आधार पर यह एफआईआर जुलाई में तब दर्ज की गई, जब राज्य में नई टीवीके सरकार सत्ता में आई.
सिब्बल ने दलील दी कि जिन घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है वे 2021-25 की हैं और ईडी द्वारा 2025 में इस अदालत में एक हलफनामा दाखिल किया गया है. सिब्बल ने दावा किया, "जिस व्यक्ति ने हलफनामा दायर किया था वह पलट गया है... क्योंकि सरकार बदल गई है. उसी हलफनामे के भरोसे 28 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई है."
सीजेआई ने राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील गुरु कृष्णकुमार से पूछा कि जब मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है, तो हिरासत में लेकर पूछताछ करने की क्या आवश्यकता है. कृष्णकुमार ने कहा कि आरोप 2021 और 2025 के बीच की घटनाओं से जुड़े हैं, और बालाजी ने एफआईआर दर्ज होने से रोक दी थी क्योंकि वह उस समय मंत्री थे.
पीठ ने कहा कि वह अब मंत्री नहीं हैं. हालांकि, राज्य के वकील ने जोर देकर कहा कि गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में अग्रिम जमानत देना सही नहीं है. पीठ ने बालाजी को अंतरिम सुरक्षा देते हुए राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा. कोर्ट ने साफ किया कि अगर राज्य सरकार उनकी हिरासत में पूछताछ की जरूरत साबित कर देती है, तो इस आदेश में बदलाव किया जा सकता है.
इससे पहले, दिन की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस वी. मोहना ने नए भ्रष्टाचार मामले में द्रमुक नेता वी. सेंथिल बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था. यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने आया था.
सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने कोर्ट को जस्टिस मोहना के सुनवाई से हटने (रिक्यूजल) की जानकारी दी. सीजेआई ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए वह और जस्टिस जोयमाल्या बागची दोपहर 1 बजे इस याचिका पर सुनवाई करेंगे.
इससे पहले गुरुवार को, शीर्ष अदालत तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) में कथित गड़बड़ियों से जुड़े एक नए भ्रष्टाचार मामले में बालाजी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हुई थी. हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय द्वारा दर्ज मामले में उन्हें पहले से जमानत देने से इनकार कर दिया था. यह मामला खुदरा शराब कारोबार में हुई कथित गड़बड़ियों के कारण सरकारी खजाने को 32.81 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है.
मद्रास हाई कोर्ट के जज जस्टिस जी. के. इलान्तिरायन ने माना था कि बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और गड़बड़ी करने की साजिश के तहत सरकारी पदों के दुरुपयोग के आरोपों को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है. पिछली डीएमके सरकार में पूर्व बिजली, मद्यनिषेध और उत्पाद शुल्क मंत्री रहे सेंथिल बालाजी ने 28 जुलाई 2026 को डीवीएसी द्वारा दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी के डर से हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी.
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