अधिकार पर रोक: ट्रम्प प्रशासन का राज्यों से फंडिंग रोकने का प्रयास अदालत से पराजित
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति ट्रम्प प्रशासन के उन प्रावधानों को रद्द कर दिया जिसके तहत वे चुनाव प्रशासन की मांगें पूरी न करने वाले राज्यों से आतंकवाद विरोधी फंडिंग रोक सकते थे। न्यायाधीश आमिर अली ने पाया कि ये शर्तें अनुदान के मूल उद्देश्य से मेल नहीं खातीं और फेमा के पास ऐसी शक्ति नहीं थी। यह निर्णय मध्यावधि चुनावों से पहले आया और चुनावी धोखाधड़ी के दावों पर आधारित प्रशासन के पिछले प्रयासों को बड़े पैमाने पर खारिज करता है।

सौजन्य से:- Amar Ujala
ट्रंप प्रशासन को झटका: अदालत ने राज्यों से चुनाव संबंधी फंडिंग रोकने पर लगाई रोक, संघीय न्यायाधीश क्या बोले?
एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के उस अधिकार को रोक दिया है जिसके तहत वह राज्यों से चुनाव प्रशासन की मांगों को पूरा न करने पर आतंकवाद विरोधी फंडिंग रोक सकता था। यह फैसला नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले आया है।
विस्तार
अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में एक संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारों पर एक बार फिर रोक लगाई है। यह अधिकार उन राज्यों से कुछ संघीय आतंकवाद विरोधी फंडिंग रोकने से संबंधित था, जो चुनाव प्रशासन की मांगों को पूरा नहीं करते थे। अदालतों ने बड़े पैमाने पर मतदान धोखाधड़ी के झूठे दावों को दर्शाने वाले प्रशासन के पिछले प्रयासों को बड़े पैमाने पर खारिज कर दिया है।
ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रया क्या?
अमेरिकी जिला न्यायाधीश आमिर अली ने सोमवार को 24 पेज की राय में लिखा कि संघीय एजेंसियों के पास कांग्रेस से अनुदानों में ऐसी शर्तें जोड़ने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि ये शर्तें अंतर्निहित अनुदान उद्देश्य से संबंधित होने की कानूनी सीमा को पूरा नहीं करती थीं। गृह सुरक्षा विभाग या उसकी उप-एजेंसी, संघीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (फेमा) ने टिप्पणी के अनुरोध पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
किस नियम को लेकर कानूनी लड़ाई?
अनुदान की शर्तों का मामला देश में चुनाव कैसे संचालित किए जाते हैं इससे जुड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने चुनाव से जुड़ी कार्रवाई की जो लंबे समय से राज्यों से जुड़ा मामला भी रहा है। मुकदमा दायर करने वाले राज्यों में-कोलंबस, ओहियो, नैशविले और डेविडसन काउंटी, टेनेसी, के अलावा एल पासो और हैरिस काउंटी, टेक्सास शामिल हैं। फेमा की आतंकवाद विरोधी अनुदान घोषणा में चुनाव से संबंधित जरूरतों की एक सूची भी शामिल है। इसमें ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि राज्यों और शहरी क्षेत्रों के लिए 20 फीसदी अनुदान तब तक रोक दिया जाएगा, जब तक वे उनका पालन नहीं करते। कार्यक्रम में राज्यों और स्थानीय सरकारों के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक शामिल हैं।
क्या थीं चुनाव संबंधी शर्तें?
राज्यों के लिए वस्तुओं की सूची में सभी पंजीकृत मतदाताओं और चुनाव कर्मियों की नागरिकता का सत्यापन शामिल था। जो स्थान वोटों की गिनती के लिए बारकोड या क्यूआर कोड का उपयोग करने वाले इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणालियों का उपयोग करते हैं। उन्हें हाथ से चिह्नित कागजी मतपत्रों पर स्विच करने की योजना प्रस्तुत करनी होगी। हर क्षेत्राधिकार को यह दिखाना होगा कि वह परिणामों का ऑडिट करता है।
FEMA के अधिकारों पर क्या सवाल उठे?
मुकदमे में, शहरों और काउंटियों ने कहा कि फेमा के पास इन शर्तों को लागू करने का कोई अधिकार नहीं था। यह न तो उसके शासी कानून के तहत था और न ही संविधान के तहत। कांग्रेस ने फेमा को आतंकवाद और साइबर हमलों से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा में मदद करने के लिए अधिकृत किया था। शहरों और काउंटियों ने लिखा कि फेमा को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन मतदान कर सकता है, मतपत्रों की गिनती कैसे की जानी चाहिए या राज्य मतदाता सूचियों का रखरखाव कैसे करते हैं। उन्होंने मुकदमे में कहा, "फेमा ने पहले कभी राज्यों और काउंटियों के चुनाव चलाने को विनियमित करने का दावा नहीं किया है।"
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
हिमाचल हाईकोर्ट ने समान वेतन को संविधानिक वास्तविकता बना दिया

कॉलेजियम ने तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफ़ारिश की

सदस्यों ने लेखा‑क़ानून के मसौदे पर राय व्यक्त की

सुप्रीम कोर्ट में याचिका: CEC ज्ञानेश कुमार पर एकपक्षीय चुनाव आयोग निर्णय का सवाल

राष्ट्रीय सभा के 17 मसौदा कानूनों की गुणवत्ता जांच: दो‑दिवसीय विशेषज्ञ सम्मेलन की शुरुआत

राष्ट्रीय सभा विशेष प्रतिनिधियों का पहला सम्मेलन शुरू, 17 मसौदा कानूनों पर चर्चा

डिजिटल कानून दौड़: QUATEST 3 में 19 सवालों का कानूनी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: समान पद पर वरिष्ठ को जूनियर से कम वेतन नहीं मिल सकता
ताज़ा ख़बरें
- पौध किस्म अधिकारों का प्रबंधन विज्ञान‑प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंपा, बौद्धिक संपदा कानून में व्यापक संशोधन
- ECI ने SIR के बावजूद चुनावी नतीजों पर असर नहीं मानते, TMC का ताजा चुनाव का याचिका खारिज
- इलेक्शन कमिशन के निर्णय‑निर्धारण में असहमति और बहुमत का संतुलन
- सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बायोजो इम्मैन्युअल फैसले को आधार बनाते हुए वंदे मातरम् संशोधन को संवैधानिक चुनौती दी
- ईसी के बयान से स्पष्ट: भाजपा और चुनाव आयोग का एकमत निर्णय, SIR पर विवाद खत्म
- राष्ट्रीय सभा के विशेषज्ञ प्रतिनिधि करेंगे 17 मसौदा कानूनों पर विस्तृत चर्चा
- कर्नाटक व पश्चिम बंगाल में चुनावी रोल से हटाए गए लाखों मतदाता: समीक्षा प्रक्रिया में देरी और अपील लंबित
- दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट के पद के लिए कलीजियम ने सिफ़ारिश की

