सिस्टम पर भरोसा रखें, पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया। जस्टिस अमानुल्ला ने याचिकाकर्ता से पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और सिस्टम पर भरोसा रखने को कहा।

सौजन्य से:- Live Hindustan
सिस्टम पर भरोसा रखें, पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग वाली याचिका को अस्वीकार कर दिया है। जस्टिस अमानुल्ला ने याचिकाकर्ता से पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और सिस्टम पर भरोसा रखने को कहा। याचिका में इन्फ्लुएंसर नाजिया इलाही खान द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणियों का जिक्र किया गया है।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें एक धर्म विशेष के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से पहले अपनी शिकायत पुलिस को देने और उनसे सिस्टम पर भरोसा रखने के लिए कहा। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्ला और शील नागू की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता मो. अनस चौधरी की ओर से अधिवक्ता रजत कुमार ने याचिका का उल्लेख करते हुए इस पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया। उन्होंने पीठ से कहा कि याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की जरूरत है क्योंकि एक धर्म विशेष के खिलाफ की गई टिप्पणियों से सांप्रदायिक अशांति फैल सकती है। जस्टिस अमानुल्ला ने कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय पुलिस/सक्षम अधिकारियों को नजरअंदाज कर सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने याचिकाकर्ता से पूछा कि ‘क्या आपने कोई केस दर्ज कराया? पुलिस मौजूद है। हमारे सिस्टम पर भरोसा रखें। हम सिर्फ सबसे ऊपर की अदालत हैं, हम निगरानी के लिए हैं। यह हमारे लिए भी यह जानने का मौका है कि क्या हमारे निचले स्तर के अधिकारी काम कर रहे हैं या नहीं?’ जस्टिस अमानुल्ला ने कहा कि अगर यहां सब कुछ शॉर्ट-सर्किट हो जाता है, तो वे भी हाथ खड़े कर देंगे कि ठीक है...ऐसा ही हो रहा है...सभी संस्थाएं बेपटरी हो रही हैं क्योंकि सब कुछ ऊपर से ही आता है।’
ऐसी बातों को सनसनीखेज न बनाएं : जस्टिस अमानुल्ला
जस्टिस अमानुल्ला ने आगाह किया कि ऐसी बातों को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए और कहा कि अगर सामान्य प्रक्रिया से सही कार्रवाई नहीं होती है, तो इस मुद्दे को उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘यह बेहद गंभीर मामला है, मैं आपसे (याचिकाकर्ता) सहमत हूं...अपनी बात करूं तो मैं इसे लेकर बहुत संवेदनशील हूं...लेकिन एक प्रक्रिया होती है। अगर वह काम न करे, तो हमारे पास आएं।’ जस्टिस अमानुल्ला ने कहा कि ‘संवेदनशील मामलों में, आप सबसे पहले भारत के नागरिक हैं, आपको इसके नतीजों को समझना चाहिए। आप वकील हैं...आप कानून जानते हैं। आप परिणाम समझते हैं। इन बातों को सनसनीखेज न बनाएं। अगर किसी एक व्यक्ति ने गलती की है, तो कानून की पूरी ताकत से उस पर कार्रवाई करें।’ यह टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि हम इस याचिका का तत्काल सुनवाई करने के प्रति इच्छुक नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता को सिस्टम पर भरोसा करने और पुलिस अधिकारी के पास अपनी शिकायत देने को कहा।
याचिका में आपत्तिजनक कंटेंट पर लगाम लगाने की मांग
याचिका के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर नाजिया इलाही खान ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान धर्म विशेष के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी, जिसके क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में केंद्र सरकार, सोशल मीडिया मंच फेसबुक, यूट्यूब, एक्स को पक्षकार बनाते हुए ऐसे कंटेंट के प्रकाशन, प्रसार को रोकने के साथ-साथ नियमन करने और उन पर लगाम लगाने के लिए दिशा-निर्देश बनाने और लागू करने का आदेश देने की मांग की गई है। याचिका में सोशल मीडिया मंचों से आपत्तिजनक कंटेट/वीडियो हटाने के लिए जरूरी कदम उठाने का आदेश देने की भी मांग की गई है।
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