सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र‑रक्षा मंत्रालय को दी कड़ी फटकार, दिव्यांग सैनिकों के लाभों में देरी पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने दिव्यांग सैनिकों के पेंशन एवं लाभ संबंधी मामलों में बहुत देर से अपीलें दायर कीं और रक्षा मंत्रालय की सिफारिश के बावजूद उन्हें वापस नहीं लिया। 2,997 प्रथम अपीलीय मामलों में से अधिकांश को खारिज कर दिया गया, जबकि केवल 142 अपीलें ही स्वीकृत हुईं। नई नियमावली को बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि विकलांगता के कारण से सेवा समाप्ति को अभी भी नियोक्ता को सिद्ध करना होगा।

सौजन्य से:- Navbharat Times
सरकार ने अपील करने में की देर
नाराज होते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और रक्षा मंत्रालय को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वे (सरकार) इन सैनिकों के खिलाफ न्यायपालिका के सभी स्तरों ट्रिब्यूनल से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मुकदमे लड़ रहे हैं। कोर्ट ने यह भी बताया कि ज्यादातर मामलों में सरकार ने बहुत देर से अपील दायर की थी।सिफारिश ठीक से लागू नहीं
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि रक्षा मंत्री की रिपोर्ट में विकलांग सैनिकों के विकलांगता और पेंशन लाभ से जुड़े लंबित मामलों में अपीलें तुरंत वापस लेने की सिफारिश की गई थी, लेकिन इस सिफारिश को ठीक से लागू नहीं किया गया। सरकार की ओर से दायर 270 से ज्यादा अपीलों को खारिज करते हुए बेंच ने कहा कि रक्षा मंत्रालय की इस तरह के मुकदमों को वापस लेने की समिति की सिफारिश को स्वीकार करने के बाद भी ऐसी अपीलें दायर की जा रही हैं।पहले ही खारिज हुईं कई अपील
बेंच ने अलग-अलग अदालती मंचों पर ऐसे मामलों के नतीजों की भी समीक्षा की। इस कानूनी लड़ाई की दुखद बात यह है कि लगभग 271 सिविल अपीलों और स्पेशल लीव याचिकाओं में से ज्यादातर समय-सीमा (लिमिटेशन) के कारण खारिज होने की स्थिति में हैं। समय-सीमा खत्म होने के कारण ऐसी कई अपीलें पहले ही खारिज की जा चुकी हैं। अभी जो मामले बचे हैं, उनकी संख्या बहुत कम है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान देना जरूरी है कि रिलीज मेडिकल बोर्ड की तरफ से खारिज किए जाने के बाद पहली अपील के चरण में खारिज होने वाली अपीलों की संख्या स्वीकार की गई अपीलों की तुलना में कहीं ज्यादा है।सिर्फ 142 अपीलें ही स्वीकार
बेंच ने बताया कि RTI एक्ट के तहत मिली जानकारी के अनुसार पहली अपीलीय अथॉरिटी के सामने आई 2,997 अपीलों में से 2,855 खारिज कर दी गईं और सिर्फ 142 अपीलें ही स्वीकार की गईं। दूसरी अपीलीय अथॉरिटी के सामने 456 अपीलें आईं, जिनमें से 439 खारिज कर दी गईं और सिर्फ 17 स्वीकार की गईं।नियमों को ठहराया सही
बेंच ने नए नियमों को सही ठहराते हुए कहा कि सिर्फ एक कारण बताने की शर्त जोड़ने और इस धारणा को हटाने से कि अगर कोई सदस्य स्वस्थ हालत में सेवा में शामिल होता है और विकलांगता के साथ सेवा छोड़ता है तो इसे सैन्य सेवा से जुड़ा माना जाना चाहिए। 'एंटाइटेलमेंट रूल्स 2008' की मूल योजना में कोई बदलाव नहीं आता, क्योंकि अन्य फ़ायदेमंद प्रावधान मोटे तौर पर वैसे ही बने हुए हैं। यह साबित करने की ज़िम्मेदारी अभी भी नियोक्ता की है कि सदस्य की विकलांगता सेवा के कारण नहीं हुई है।'अमेरिकी संस्था' ने खुलेआम भारत के खिलाफ फैलाया झूठ, खुली पोल
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