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वसीयत पर बनाने वाले के अंगूठे की निशानी, फिर भी नहीं मिली कानूनी मान्यता, सुप्रीम कोर्ट ने समझाया कानून

70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने लिया तलाक, जानें क्या थी मजबूरी कि हाई कोर्ट ने दे दी मंजूरी संदिग्ध वसीयत की क्या थी पृष्ठभूमि यह विवाद तमिलनाडु का है। एक व्यवसायी वयापुरी गौंडरमल की पारिवारिक संपत्ति और उत्तरा…

17 अगस्त 2026 को 09:55 am बजे
वसीयत पर बनाने वाले के अंगूठे की निशानी, फिर भी नहीं मिली कानूनी मान्यता, सुप्रीम कोर्ट ने समझाया कानून

सौजन्य से:- navbharattimes.indiatimes.com

70 साल की पत्नी, 72 साल का पति, दोनों ने लिया तलाक, जानें क्या थी मजबूरी कि हाई कोर्ट ने दे दी मंजूरी

संदिग्ध वसीयत की क्या थी पृष्ठभूमि

यह विवाद तमिलनाडु का है। एक व्यवसायी वयापुरी गौंडरमल की पारिवारिक संपत्ति और उत्तराधिकार से संबंधित था। वयापुरी गौंडरमल की तीन पत्नियां थीं। उनकी तीसरी पत्नी अरुकनियाम्मल की कोई संतान नहीं थी। पति की मृत्यु के बाद कुछ संपत्ति अरुकनियाम्मल के पास आई। वर्ष 1985 में उनकी मृत्यु के बाद यह सवाल उठा कि इस संपत्ति का उत्तराधिकारी कौन होगा। एक पक्ष का कहना था कि अरुकनियाम्मल बिना वसीयत के मरी थीं। इसलिए पति से प्राप्त संपत्ति कानून के अनुसार उनके पति के उत्तराधिकारियों को वापस जानी चाहिए। इसी बीच दूसरे पक्ष ने वर्ष 1976 की एक पंजीकृत वसीयत पेश की और दावा किया कि अरुकनियाम्मल ने संपत्ति उनके पक्ष में वसीयत कर दी थी। यही वसीयत पूरे मुकदमे का मुख्य आधार बनी।जन्म और मृत्यु पंजीकरण कानूनों में हुआ बदलाव, इसके लिए कितने दिनों में रजिस्ट्रेशन कराना है जरुरी

विवादित वसीयत में क्या था?

यह विवादित वसीयत 15 दिसंबर 1976 की थी। उसमें अरुकनियाम्मल का बाएं हाथ का अंगूठे का निशान मौजूद था। वसीयत तैयार करने वाले लेखक ने अदालत में बयान दिया कि अरुकनियाम्मल ने संपत्ति के संबंध में निर्देश दिए थे। दस्तावेज तैयार किए जाने के बाद उसे उन्हें पढ़कर सुनाया गया और उन्होंने उसे स्वीकार करते हुए अंगूठे का निशान लगाया। इसके बाद दो गवाहों ने वसीयत पर अपने हस्ताक्षर किए। लेकिन मुकदमे के दौरान दोनों गवाहों को अदालत के सामने पेश करने में कठिनाई हुई। ऐसे में वसीयत को अन्य साक्ष्यों के माध्यम से साबित करने का प्रयास किया गया। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या उपलब्ध साक्ष्य वसीयत को कानून के अनुसार सिद्ध करने के लिए पर्याप्त थे?महिला के नाम पूरी संपत्ति लेकिन Will नहीं, तो मृत्यु के बाद मालिक कौन? Hindu Succession Act और Supreme Court के फैसले से जानें

सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन और अंगूठे का निशान पर टिप्पणी

- सुप्रीम कोर्ट में यह मामला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की बेंच में सुना गया।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी दस्तावेज पर अंगूठे का निशान होना और उस दस्तावेज को समझकर अपनी स्वतंत्र इच्छा से स्वीकार करना दो अलग-अलग बातें हैं। अंगूठे का निशान यह दिखा सकता है कि व्यक्ति ने दस्तावेज पर निशान लगाया था। लेकिन इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि व्यक्ति को यह जानकारी थी कि वह किस दस्तावेज पर निशान लगा रहा है और उसका संपत्ति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

- अदालत ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 59 का उल्लेख करते हुए कहा कि वसीयत बनाने वाले व्यक्ति में वसीयत करने की कानूनी क्षमता होनी चाहिए।

- इसी तरह धारा 61 के तहत धोखाधड़ी, दबाव या ऐसी अनुचित प्रभावकारी परिस्थितियों से बनाई गई वसीयत को कानून मान्यता नहीं देता।

- हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अधिक उम्र, बीमारी, अशिक्षा या अंगूठे का निशान इस्तेमाल करने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति वसीयत बनाने में सक्षम नहीं था। मुख्य प्रश्न यह रहेगा कि वसीयत बनाते समय वह व्यक्ति अपने कार्य की प्रकृति और उसके परिणाम को समझने की स्थिति में था या नहीं।

- फिर आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के वर्ष 2008 के फैसले को रद्द कर दिया और वर्ष 1991 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले और संपत्ति-विभाजन के आदेश को बहाल कर दिया। अदालत ने संपत्ति के अंतिम बंटवारे और कब्जे से जुड़े आवश्यक कदमों को अंतिम विभाजन की कार्यवाही में कानून के अनुसार तय करने का निर्देश दिया।

वसीयत से जुड़ी कौन-कौन सी संदेहास्पद परिस्थितियां थीं?

- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वसीयत से जुड़ी कई परिस्थितियों को एक साथ देखा। जिसके बाद कुछ चीजें संदेह जनक लगीं।

- अदालत के सामने यह बात आई कि वसीयत में संबंधित संपत्ति को अरुकनियाम्मल की स्वयं अर्जित संपत्ति बताया गया था, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड से संपत्ति के उनके पास पति के माध्यम से आने का संकेत मिलता था। वसीयत में कुछ पारिवारिक संबंधों का वर्णन भी वास्तविक संबंधों से अलग था।

- इसके अलावा वसीयत के कारण परिवार की कुछ शाखाएं संपत्ति से पूरी तरह बाहर हो रही थीं, जबकि दूसरी शाखा के चार सदस्यों को संपत्ति का लाभ मिल रहा था।

- अदालत ने गवाहों के संबंध, संपत्ति पर पहले से कब्जे और नियंत्रण के दावे, वसीयत की अभिरक्षा तथा उसे लाभार्थियों तक पहुंचाने के समय से जुड़े तथ्यों को भी ध्यान में रखा।

- एक अन्य महत्वपूर्ण परिस्थिति यह थी कि ऐसी व्यक्ति, जो वसीयत के लाभार्थी पक्ष से निकट रूप से जुड़ी थी और कथित तौर पर अरुकनियाम्मल की देखभाल करती थी, उसे अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया।

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