सुप्रीम कोर्ट में 'डायनेमिक प्राइसिंग' पर जल्द होगी सुनवाई, टिकट किराए में बढ़ोतरी पर नियंत्रण की मांग
सुप्रीम कोर्ट में 'डायनेमिक प्राइसिंग' पर जल्द होगी सुनवाई, जिसमें टिकट किराए में अचानक बढ़ोतरी पर नियंत्रण, अतिरिक्त शुल्कों पर पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती जैसी मांगें शामिल हैं।

सौजन्य से:- Navbharat Times
S. Laxminarayanan द्वारा दायर जनहित याचिका (W.P.(C) No. 1124/2025) में आरोप लगाया गया है कि एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं। याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था आम यात्रियों के हितों के विपरीत है और इसमें पारदर्शिता का अभाव है।
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उपभोक्ता अधिकार और डायनेमिक प्राइसिंग से जुड़ी याचिका
हवाई यात्रा में मनमाने किराए और एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क लिए जाने से आम उपभोक्ता परेशान रहता है। लेकिन इस दिशा में कोई खास गाइडलाइन्स न होने की वजह से वो मजबूर है। ऐसे में यह याचिका एयरलाइंस कंपनियों के इस मनमाने रवैये के खिलाफ दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि भारत में निजी एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमन के डायनेमिक प्राइसिंग (Dynamic Pricing) अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। याचिका आज सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट में W.P.(C) No. 1124/2025 – S. Laxminarayanan vs Union of India & Ors. नामक जनहित याचिका (PIL) सूचीबद्ध है।डायनेमिक प्राइसिंग से जुड़ी याचिका में की गई मांगे
- एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग की निगरानी और नियमन किया जाए।
- एयर टिकट के किराए में होने वाली अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
- एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क (जैसे सीट चयन, सामान, प्राथमिकता सेवाएं आदि) को पारदर्शी बनाया जाए।
- यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
- एक स्वतंत्र Aviation Tariff and Consumer Protection Commission या इसी प्रकार का नियामक निकाय गठित किया जाए।
- घरेलू उड़ानों में इकोनॉमी क्लास के लिए कम-से-कम 25 किलोग्राम मुफ्त चेक-इन बैगेज बहाल करने की मांग भी की गई है।
डायनेमिक प्राइसिंग क्या है, हवाई जहाज इसमें क्या करते हैं
सरल भाषा में समझाया जाए, तो कहा जा सकता है कि डायनेमिक प्राइसिंग, एक ऐसी कीमतों को निर्धारित करने वाली रणनीति है जहाँ कंपनियाँ बाज़ार की माँग, ग्राहकों के व्यवहार और वास्तविक समय के डेटा के आधार पर अपने उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में लगातार बदलाव करती हैं। इसी के आधार पर हवाई जहाज कंपनियां, किसी एक उड़ान के लिए एक तय कीमत तय करने के बजाय, मांग के अनुसार हर घंटे या दिन टिकट के दाम बदलती हैं। यदि किसी विशेष रूट पर अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है या किसी सीट की मांग अधिक होती है, तो कीमतें बढ़ा दी जाती हैं।पिताजी ने 'वसीयत' नही छोड़ी, ऐसे में क्या बिना वसीयत के संपत्ति बंटवारा हो सकता है? जानिए कानून क्या कहता है
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो तो क्या असर होगा?
दरअसल, याचिक एक बड़े जनहित से जुड़ी है। इसलिए पूरी संभावना है कि सुप्रीम कोर्ट इस पर गंभीरता से सुनवाई करे। यदि सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता की मांगों को स्वीकार करता है या केंद्र सरकार को नई नीति बनाने का निर्देश देता है, तो फिर- टिकटों की कीमतों में अधिक पारदर्शिता आ सकती है।
- अचानक होने वाली अत्यधिक किराया वृद्धि पर नियंत्रण संभव हो सकता है।
- अतिरिक्त शुल्कों को लेकर स्पष्ट नियम बन सकते हैं।
- यात्रियों के उपभोक्ता अधिकार मजबूत हो सकते हैं।
- एयरलाइंस की मूल्य निर्धारण प्रणाली पर निगरानी बढ़ सकती है।
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