सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के अनिवार्य गायन पर सजा न देने का आदेश दिया, सरकार को जवाबदेही का नोटिस भेजा
न्यायालय ने कहा कि धार्मिक कारणों या किसी भी वजह से यदि कोई राष्ट्रीय गीत के सभी छंद नहीं गाता, तो उस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 25‑26 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हुए इस विषय की व्याख्या में 1986 के बिजो इमैनुअल सिद्धांतों को लागू करने की संभावना जताई।

सौजन्य से:- livehindustan.com
वंदे मातरम् ना गाने पर नहीं होनी चाहिए सजा, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई वंदे मातरम नहीं गाता या फिर 6 अंतरे नहीं गाता तो उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाता है या फिर सारे आंतरे नहीं गाता है तो उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट नेइस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है। गायक टीएम कृष्णा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई की वंदे मातरम् से जुड़े कानून की व्याख्या करते वक्त 1986 के 'बिजो एमैनुअल' के तय सिद्धातों को लागू किया जाएगा।
आपको बता दें कि जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र में एक संशोधन विधेयक लाकर वंदे मातरम को इसके अंतरगत लाया गया था। 29 जुलाई को राज्यसभा में और फिर 30 जुलाई को लेकसभा में विधेयक को पास करके कानून बनाया दिया गया और वंदेमातरम गाना अनिवार्य किया गया था। इसे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले आया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत को दो अंतरे तक ही सीमित रखने पर विचार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि इस बात पर विचार करने को तैयार है कि इसे ना गाने को दंडनीय अपराध ना बनाया जाए।
राष्ट्रगान ना गाने पर नहीं हो सकती सजा
सीजेआई सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तय किया गया था कि राष्ट्रगान ना गाने पर किसी को सजा नहीं दी जाएगी और यह अब भी लागू होता है।
केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने इस पीआईएल पर सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारियों के संबंध में कानून में दंड के प्रावधानों की समीक्षा होनी चाहिए।
आपको बता दें कि कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी एम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका फाइल की थी और कहा था कि वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आखिरी के चार अंतरे में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी देवताओं की आर्चना का भाव है और एक धर्मनिरपेक्ष देश में इसे अनिवार्य कर देना संविधान का उल्लंघन है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान और कानून के राज में विश्वास नहीं करते और उनकी सोच नक्सलवादी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत की अहम भूमिका थी और इसे भुलाना नहीं चाहिए।
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