किराएदार को बेदखली से नहीं बचता बैंकों का विलय: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंकों का विलय किराएदार को दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली से राहत नहीं दिला सकता है, अगर मकान मालिक की लिखित सहमति नहीं है। अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक से कनॉट सर्कस में किराए के परिसर का कब्जा 31 जनवरी, 2027 तक खाली करने का निर्देश दिया।

सौजन्य से:- Hindustan
बैंकों का विलय किराएदार को बेदखली से नहीं बचाता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मकान मालिक से लिखित सहमति नहीं है, तो किरायेदार को दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत बेदखली से राहत नहीं मिलेगी। अदालत ने पंजाब नेशनल बैंक को 31 जनवरी, 2027 तक किराए के परिसर को उसके मालिक को सौंपने का निर्देश दिया। विवाद 1987 से चल रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गुरुवार को कहा कि अगर मकान मालिक की लिखित सहमति प्राप्त नहीं की गई हो तो फिर किसी किराएदार बैंक का दूसरे बैंक में विलय होने से उसे दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली से छूट नहीं मिलती। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति के. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को कनॉट सर्कस में किराए के परिसर का कब्जा 31 जनवरी, 2027 तक शांतिपूर्ण तरीके से खाली करते हुए उसके मालिक ब्रिटिश मोटर कार कंपनी लिमिटेड को सौंपने का निर्देश दिया। इस फैसले के साथ ही करीब चार दशक पुराने विवाद का अदालत ने निपटारा किया। अदालत ने ब्रिटिश मोटर कार कंपनी की बेदखली याचिका को स्वीकार किया। कंपनी ने 1987 में स्थानीय अदालत का रुख किया था। जस्टिस करोल ने निर्णय में कहा कि भले ही विलय अनैच्छिक हो या सरकारी अधिसूचना के तहत अनिवार्य किया गया हो, इससे उत्तराधिकारी बैंक को मकान मालिक की अनुमति लेने की जरूरत से छूट नहीं मिलती। अदालत ने कहा कि हम यह मानते हैं कि मूल किराएदार एचसीबी का पीएनबी में विलय होने से पीएनबी धारा 14(1)(ख) के तहत परिसर से निष्कासन के लिए उत्तरदायी हो गया।
यह था मामला
विवाद 1947 का है, जब ब्रिटिश मोटर कार कंपनी लिमिटेड ने प्रताप भवन, कनॉट सर्कस स्थित एक प्रमुख वाणिज्यिक परिसर हिंदुस्तान कमर्शियल बैंक (एचसीबी) को किराये पर दिया था। इसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) समर्थित योजना के तहत दिसंबर, 1986 में एचसीबी का पीएनबी में विलय हो गया, जिसके बाद परिसर का कब्जा पीएनबी के पास चला गया। मकान मालिक ने यह कहते हुए बेदखली की कार्यवाही शुरू की कि बिना उसकी लिखित सहमति के परिसर का कब्जा पीएनबी को हस्तांतरित करना दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 14(1)(ख) के तहत ‘कब्जा हस्तांतरण’ माना जाएगा।
FAQs
इस खबर पर आपकी क्या राय है?
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
बिहार विश्वविद्यालय कानून के विरोध में शिक्षक संघों का प्रदर्शन

लोकसभा में ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक पेश, 16 न्यायाधिकरणों के लिए निगरानी

मानदेय बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी गई लड़ाई

पिछली तारीख से टैक्स की देनदारी सही, लेकिन जुर्माना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

बिहार में गुजरात मॉडल की शराबबंदी लागू होनी चाहिए: जीतन राम मांझी

दुर्गा कॉलोनी का दोबारा सर्वे: फरीदाबाद में 234 एकड़ जमीन की होगी जांच, प्लॉटधारकों को राहत की उम्मीद

पिता को अदालत का झटका: बेटी की शिक्षा के लिए जमा पैसा भरण-पोषण में नहीं गिना जा सकता

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिलेगी दुर्गा बिल्डर कॉलोनी के प्लॉटधारकों को राहत
ताज़ा ख़बरें
- ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026: जयराम रमेश ने केंद्र की योजना का किया समर्थन
- मेटा को 567 मिलियन डॉलर का भुगतान करने का आदेश, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए
- दोषियों की अपीलों में देरी को माफ करने का मौका, न्यायपालिका ने दी दिशानिर्देश
- JPSC परीक्षा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट में याचिका, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- शासन को आरोप तय करने में लगे 10 साल, अदालत में पहुंचते ही निरस्त
- उत्तर प्रदेश सरकार ने मृत कर्मचारियों के पुत्रों को नौकरी देने का निर्देश दिया
- JPSC परीक्षा का सुप्रीम कोर्ट में विवाद: परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग
- बच्चों की शिक्षा पर भार : शिक्षक भर्ती के लंबित मुकदमों के लिए स्पेशल कोर्ट, संघ ने दी मांग

