ममता ने ईसीआई के टीएमसी नाम‑चिह्न फ्रीज आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की, जिसमें ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह दोनों विरोधी गुटों के बीच विवाद के कारण फ्रीज कर दिया गया था। उन्होंने इस आदेश को मनमाना कर रद्दीकरण की मांग की, जबकि आयोग ने इस विवाद के अंतिम समाधान तक प्रतिबंध बरकरार रखने की बात कही।

सौजन्य से:- Hindustan
चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न आवंटित किए हैं। बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे 'मनमाना' बताते हुए रद्द करने की मांग की है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के उस फैसले को चुनौती दी है जिसके तहत टीएमसी के दो विरोधी गुटों के बीच विवाद के कारण टीएमसी का नाम और पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करते हुए शुक्रवार को दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए। आयोग ने गुरुवार को पार्टी पर दावों को लेकर ममता बनर्जी गुट और अरूप रॉय गुट के बीच विवाद का अंतिम समाधान होने तक ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक लगा दी थी।
निर्वाचन आयोग के इस फैसले के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रितब्रता बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है। याचिका में आयोग के फैसले को मनमाना बताते हुए रद्द करने की मांग की है। निर्वाचन आयोग ने बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं का पक्ष सुनने के बाद कहा था कि इस मामले में ‘चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968’ के प्रावधानों के तहत आयोग द्वारा ठोस निर्णय लिए जाने की जरूरत है। साथ ही कहा था कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता है, तब तक टीएमसी और इसके आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। आयोग के इस फैसले की आलोचना करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी की पहचान खोने की तुलना बच्चे को खोने वाली मां के दर्द से की और इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ‘काला दिन’ बताया था।
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