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पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर है निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, NDPS एक्ट केस में हाईकोर्ट ने मांगी पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन

पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर है निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, NDPS एक्ट केस में हाईकोर्ट ने मांगी पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार आरोपी की अर्जी पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला दिया है.…

17 अगस्त 2026 को 04:56 pm बजे
पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर है निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, NDPS एक्ट केस में हाईकोर्ट ने मांगी पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन

सौजन्य से:- ETV Bharat

पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर है निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार, NDPS एक्ट केस में हाईकोर्ट ने मांगी पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन

एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार आरोपी की अर्जी पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला दिया है. रजनीश शर्मा की रिपोर्ट

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : August 17, 2026 at 9:33 PM IST

शिमला: एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार आरोपी की अर्जी पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है. दरअसल, चंबा जिला पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी की थी. उसी मामले में आरोपी ने अदालत में अर्जी डालकर मौके के दौरान पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन का पता करने का आग्रह किया था. अदालत ने आरोपी की अर्जी मंजूर कर पुलिस कर्मियों की टावर लोकेशन मांगते हुए कहा कि पुलिस की प्राइवेसी से ऊपर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार आता है. इस तरह अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकारी से जुड़ा बड़ा फैसला दिया है.

हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने स्पष्ट किया है कि किसी भी आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए निष्पक्ष सुनवाई का पूरा कानूनी अधिकार है. यह अधिकार पुलिस अफसरों की प्राइवेसी यानी निजता के अधिकार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है. न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में आरोपी की याचिका को स्वीकार करते हुए जांच से जुड़े संबंधित पुलिस कर्मियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन पेश करने के आदेश दिए हैं.

इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राकेश कैंथला ने जिला चंबा की विशेष अदालत के फैसले को पलटते हुए उपरोक्त आदेश जारी किए. मामले के अनुसार याचिकाकर्ता आकाश महाजन के खिलाफ पुलिस ने चंबा की अदालत में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 यानी चरस/नशीले पदार्थ की बरामदगी के तहत चार्जशीट दाखिल की थी. आरोपी का दावा था कि कथित घटना 8 सितंबर 2024 को हुई थी. पुलिस ने जिस स्थान और समय पर उसकी गिरफ्तारी व नशे की बरामदगी दिखाई है, वह पूरी तरह संदिग्ध है. आरोपी ने सच्चाई सामने लाने के लिए निचली अदालत में अर्जी दाखिल कर टीम में शामिल पुलिसकर्मियों के मोबाइल नंबरों की टावर लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड मंगवाने की मांग की थी. हालांकि, विशेष अदालत चंबा ने पुलिसकर्मियों की प्राइवेसी का हवाला देकर इस अर्जी को खारिज कर दिया था.

आरोपी का कहना था कि उसे पुलिसकर्मियों की आपसी बातचीत यानी कन्वर्सेशन डिटेल्स जानने में कोई दिलचस्पी नहीं है. वह केवल घटना के समय पुलिस टीम की वास्तविक लोकेशन अर्थात टावर लोकेशन जानना चाहते हैं, ताकि यह साबित हो सके कि नंबर उन्हीं पुलिसकर्मियों के हैं. इसके बाद प्राइवेसी उल्लंघन का तर्क खुद ही खत्म हो जाता है. अभियोजन पक्ष यानी पुलिस एक विशिष्ट थ्योरी लेकर आया है कि आरोपी को अमुक स्थान पर दबोचा गया. ऐसे में पुलिस अफसरों की मोबाइल टावर लोकेशन से यह साफ हो जाएगा कि वे उस समय वास्तव में कहां मौजूद थे. यह साक्ष्य पुलिस की कहानी को सत्यापित करने या उसका खंडन करने में अदालत की बड़ी सहायता करेगा.

हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि एनडीपीएस जैसे कड़े कानूनों में आरोपी के खिलाफ वैधानिक धारणा काम करती है, इसलिए उसे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए हर जरूरी साक्ष्य जुटाने का पूरा मौका मिलना चाहिए. हाईकोर्ट ने मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को आदेश दिए हैं कि वे घटना के दिन यानी 8 सितंबर 2024 की सुबह छह बजे से लेकर 9 सितंबर 2024 की सुबह छह बजे तक यानी 24 घंटे की केवल लोकेशन से जुड़ी जानकारियां और उपभोक्ता आवेदन फॉर्म न्यायालय में पेश करें. अदालत के इस आदेश के दायरे में सब-इंस्पेक्टर गुरबख्श, कांस्टेबल केवल सिंह, कांस्टेबल जितेंद्र सिंह, होमगार्ड अजय कुमार, कांस्टेबल संदीप कुमार, हेड कांस्टेबल दलीप सिंह, होमगार्ड राजेंद्र सिंह और होमगार्ड तरबीज सिंह के मोबाइल विवरण शामिल हैं.

ये भी पढ़ें: क्या हिमाचल में अतीत की बात हो जाएगी डीए और एरियर की अदायगी, वित्त सचिव ने कही थी फ्रीज करने की बात, अब आगे क्या?

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